भारी उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले एचएमटी समूह के तीन उपक्रमों को बंद करने और सभी कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) देने के सरकार के फैसले पर सभी कर्मचारी सहमत नहीं हैं।
उत्तराखंड के रानीबाग इकाई में तो आधे से अधिक कर्मचारियों ने वीआरएस लेने से इंकार कर दिया है, जबकि बंगलूरू इकाई में भी ऐसे कर्मचारियों की संख्या डेढ़ सौ के करीब है। कर्मचारियों के इस रुख से परेशान कंपनी के अधिकारियों ने मंत्रालय को इस तथ्य से अवगत करा दिया है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रानीबाग इकाई में इस समय करीब ढाई-तीन सौ कर्मचारी कार्यरत हैं। उनमें से करीब 200 कर्मचारियों ने वीआरएस लेने से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि या तो सरकार कारखाने में फिर से उत्पादन शुरू करे या फिर उन्हें उसी तरह वेतन का भुगतान करती रहे जैसे कि अभी तक हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने एचएमटी वॉचेज लिमिटेड, एचएमटी चिनार वॉचेज लिमिटेड और एचएमटी बियरिंग लिमिटेड को बंद कर उनके कर्मचारियों को वर्ष 2007 के वेतन के आधार पर वीआरएस देने का फैसला किया है।