यात्रा और पर्यटन क्षेत्र में अगस्त में 44 फीसदी भर्तियां बढ़ी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना के दौरान 2020 में इस क्षेत्र के रोजगार में 47 फीसदी की गिरावट आई थी। 2021 में 27 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, उसके बाद फिर से इस उद्योग के रफ्तार पकड़ने से भर्तियों में तेजी आ गई है। भारत ने पर्यटन निर्माण प्रोजेक्ट में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूदी दे दी है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में और तेजी आ सकती है। टियर-2 शहरों जैसे जयपुर में अगस्त में 34 फीसदी, अहमदाबाद में 33%, बड़ौदा में 25% और चंडीगढ़ में 33% भर्तियां बढ़ी हैं।
रत्न-आभूषण उद्योग दो महीने के लिए बंद कर सकता है हीरे का आयात
वैश्विक मांग में कमी और घरेलू कंपनियों के पास बढ़ते भंडार के बीच रत्न व आभूषण उद्योग ने अपने सदस्यों से 15 अक्तूबर से दो महीने के लिए कच्चे हीरों का आयात बंद करने को कहा है। उसके बाद इसकी फिर समीक्षा होगी। अमेरिका व चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से ढीले पॉलिश वाले हीरे और आभूषणों की मांग पिछली कई तिमाहियों में प्रभावित हुई है। उद्योग के सर्कुलर के मुताबिक, जनवरी-अगस्त में हमारा निर्यात 25 फीसदी घटा है। सितंबर में भी ऐसा ही रुझान है। इसलिए, आकलन किया गया कि कच्चे हीरों के आयात को रोकने से उद्योग को मांग व आपूर्ति के बीच संतुलन को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी।
रबी सीजन के लिए बीजों की उपलब्धता जरूरत से अधिक
गेहूं जैसी फसल के लिए रबी सीजन 2023-24 में बुवाई के लिहाज से बीजों की उपलब्धता 159.03 लाख क्विंटल या देश की जरूरत से 20.70 फीसदी अधिक होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन के लिए बीज की कुल जरूरत 131.75 लाख क्विंटल होने का अनुमान है। रबी फसलों की बुवाई की शुरुआत अक्तूबर से होती है। कटाई मार्च-अप्रैल से होती है। गेहूं रबी सीजन का मुख्य फसल है।
102.6 लाख क्विंटल गेहूं के बीज की आवश्यकता
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, गेहूं के बीज की उपलब्धता 123.43 लाख क्विंटल होने का अनुमान है। इस वर्ष के रबी सीजन के लिए 102.63 लाख क्विंटल गेहूं के बीज की आवश्यकता है। रबी सीजन के लिए ज्वार की उपलब्धता 1.04 लाख क्विंटल रहने का अनुमान है, जबकि आवश्यकता 74,000 क्विंटल की है। दलहन के मामले में चने के बीज की उपलब्धता 25.04 लाख क्विंटल होगी, जबकि आवश्यकता 21.38 लाख क्विंटल है। मसूर बीज की उपलब्धता 2.88 लाख क्विंटल आंकी गई है। जरूरत 2.29 लाख क्विंटल है।
2030 तक 30 लाख यूनिट होगी ईवी चार्जर की मांग
घरेलू बाजार में ईवी चार्जर की मांग 2030 तक सालाना 65 फीसदी चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़कर 30 लाख यूनिट तक पहुंचने की उम्मीद है। 2021 में देश में 17,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक चार्जर बेचे गए थे। कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस व इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ईवी बाजार तेजी से बढ़ रहा है। सरकार व निजी क्षेत्रों से मांग बढ़ रही है। अनुमान है कि सीईएसएल, एनटीपीसी, विद्युत व्यापार निगम, इंडियन ऑयल व केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड जैसी सरकारी कंपनियां इस साल 6,000 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन लगा सकती हैं।
विरासत की पहचान कर संजोने का काम करें : संजीव सान्याल
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्य संजीव सान्याल ने डीयू के श्यामलाल कॉलेज में आयोजित सम्मेलन में कहा कि भारत के पास विश्व को देने के लिए काफी कुछ है। यही समय है कि हम अपनी विरासत को पहचाने और उसे संजोने का काम करें। कॉलेज में 24 सितंबर को शुरु हुए इस सम्मेलन का विषय इंटरनेशनल बिजनेस एंड इकोनॉमिक्स ऑफ सप्तसिंधु- अ हिस्टोरिकल ट्रांसफॅर्मेशन एंड ग्लोबल इम्पैक्ट था। सम्मेलन में देश-विदेश के विभिन्न विद्वानों ने अपने विचार साझा कर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में भारत की ऐतिहासिक भूमिका पर चर्चा हुई।
सम्मेलन में वक्ताओं ने उप-निवेशवादी हीनता बोध से निकलने की जरूरत पर भी बल दिया, जो नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बखूबी किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो रबि नारायण कर, आईक्यूएसी एवं आईकेएस के निदेशक प्रो कुशा तिवारी ने किया। सम्मेलन में एशिया पैसिफिक यूनिवर्सिटी, जापान के प्रो मुनीम बराई, डीयू के बिजनेस इकोनॉमिक्स विभाग में प्रो वीके कॉल, बीएसएसएफ के अतिरिक्त महानिदेशक प्रो पी.के मिश्रा समेत अन्य ने विचार व्यक्त किए।