भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत काफी अहमियत रखती है। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में लगातार चौथे दिन तेजी का सिलसिला जारी रहा। कच्चे तेल का दाम पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। लगातार हो रहे इजाफे से देश में भी पेट्रोल और डीजल के दाम में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा। तेल के बढ़े हुए दाम ना सिर्फ जनता बल्कि सरकार के लिए भी बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।
पिछले एक महीने में कच्चे तेल के दाम में 7.50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जिससे भारत को आयात पर अधिक डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं।
ऐसे में तेल की कीमत में हो रहा इजाफा सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। बता दें कि भारत 75 फीसदी से अधिक कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में डिलीवरी के लिए कच्चे तेल का भाव 52 डॉलर या 1.19 फीसदी की तेजी के साथ 4,414 रुपये प्रति बैरल रहा।
क्रूड ऑयल के दाम में हो रहे इजाफे से पेट्रोल और डीजल की कीमत में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि मंगलवार को देश के चार देश के चार महानगरों में पेट्रोल के दाम में पांच पैसे प्रति लीटर की कटौती हुई। जिसके बाद नई दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल के दाम क्रमश: 72.80, 74.82, 78.37 और 75.56 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। वहीं डीजल के दाम में किसी तरह का बदलाव देखने को नहीं मिला है।