देश के सबसे बड़े निजी बैंक, एचडीएफसी बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे के पीछे के असल कारणों का सार्वजनिक तौर पर खुलासा किया है। सोमवार को दिए गए एक बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक द्वारा एटी-1 बॉन्ड की 'मिससेलिंग' (गलत तरीके से बिक्री) और बैंक का लगातार खराब वित्तीय प्रदर्शन उनके पद छोड़ने का मुख्य कारण बना। चक्रवर्ती ने प्रबंधन के साथ व्यक्तिगत मतभेदों की खबरों को 'बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया' बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उनके इस्तीफे की मुख्य वजह मूल्यों और नैतिकता में असंगति थी।
एक साक्षात्कार में चक्रवर्ती ने गहरी निराशा जताते हुए कहा कि बैंक प्रबंधन ने एटी-1 बॉन्ड की मिससेलिंग को गंभीरता से लेने के बजाय केवल एक "तकनीकी समस्या" माना था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले में कार्रवाई आठ साल की देरी से तब हुई, जब भारत और दुबई के नियामकों ने इस मुद्दे को सख्ती से उठाया।
अपने कार्यकाल के खत्म होने से एक साल पहले ही इस्तीफा देने वाले चक्रवर्ती ने अपने त्यागपत्र में बैंक के 'अंडर-परफॉर्मेंस' (खराब प्रदर्शन) को भी एक बड़ा कारण बताया। उन्होंने बैंक के शेयरों की कम कीमत, सस्ते चालू और बचत खाता (सीएएसए) जमा की घटती हिस्सेदारी और उच्च लागत-आय अनुपात पर गंभीर चिंता व्यक्त की। चक्रवर्ती ने यह भी स्पष्ट किया कि मूल कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड के बैंक में विलय का उनके इन कारकों या इस्तीफे से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र निदेशक के रूप में बैंक के लिए बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है।
पूंजी बाजार नियामक सेबी द्वारा हाल ही में स्वतंत्र निदेशकों को जिम्मेदारी से काम करने और 'इशारेबाजी' से बचने की दी गई सलाह पर प्रतिक्रिया देते हुए, चक्रवर्ती ने कहा कि उन्होंने अपने पत्र में मूल्यों और नैतिकता पर "असंगति" का स्पष्ट उल्लेख किया है। हालांकि, गोपनीयता का हवाला देते हुए उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या उन्होंने नियामकों को अपनी चिंताओं से अवगत कराया था या बोर्ड स्तर पर इस मुद्दे को उठाया था।
इसके अलावा, चक्रवर्ती ने इन अटकलों को भी खारिज कर दिया कि उनके इस्तीफे के कारण ही बैंक के शेयरों में भारी गिरावट आई; उन्होंने स्पष्ट किया कि शेयर बाजार में उथल-पुथल का मुख्य कारण ईरान युद्ध और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रतिकूल कदम थे। उन्होंने यह भी साफ किया कि एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज का आईपीओ लाने का निर्णय आरबीआई के एक तय समय-सीमा वाले आदेश से प्रेरित था, न कि जापान के एमयूएफजी के साथ संभावित सौदे पर प्रबंधन के साथ किसी मतभेद के कारण।