बॉम्बे हाईकोर्ट ने छह महिला जूनियर डॉक्टरों से छेड़छाड़ के आरोपी सरकारी केईएम अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर को गिरफ्तारी से पूर्व जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा है कि पीड़ितों को हुई "भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक पीड़ा" पर विचार करना जरूरी है।
अदालत ने कहा कि अब तक कोई भी वरिष्ठ डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए तैयार नहीं था, क्योंकि वे सदमे में थे और उन्हें डर था कि उनका करियर प्रभावित होगा। पीठ ने कहा कि यदि देवकर को अग्रिम जमानत दी गई तो पूरी संभावना है कि वह सभी शिकायतकर्ता पीड़ितों से बदला लेगा और इस बात की भी पूरी संभावना है कि वह वही कृत्य दोहराएगा।
अदालत ने कहा, "अंततः, हमें उन पीड़ितों को होने वाले भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक नुकसान पर विचार करना होगा जो अपनी मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, और अस्पताल जैसे कार्यस्थल में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, और महिलाओं की गरिमा की नैतिक व कानूनी रूप से रक्षा करने के लिए, वर्तमान अग्रिम जमानत आवेदन को खारिज किया जाना चाहिए।"
देवकर के खिलाफ भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। मामला दर्ज होने के बाद निलंबित किए गए देवकर ने अपनी याचिका में कहा कि उनके खिलाफ शिकायत व्यक्तिगत द्वेष और अस्पताल की आंतरिक राजनीति का परिणाम है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि देवकर कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न निवारण (संरक्षण, निषेध और निवारण) अधिनियम के तहत अस्पताल की आंतरिक समिति के सदस्य भी थे।