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GTRI: रुपये में कमजोरी से देश के आयात बिल में होगी वृद्धि, GDP पर भी बढ़ेगा दबाव; सोना आयात महंगा होने का दावा

Sat, 18 Jan 2025 06:37 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली

सार

आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने शुक्रवार को कहा, वैश्विक बाजार में जिंसों की कीमतें बढ़ रही हैं। रुपये में कमजोरी से आयात बिल के साथ देश में ऊर्जा और कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ेंगी। इससे अर्थव्यवस्था और महंगाई के मोर्चे पर दबाव बढ़ेगा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आर्थिक वृद्धि दर के उम्मीद से अधिक धीमी रहने के बाद अब रुपये में लगातार गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट गहराता जा रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में गिरावट से भारत के सोने का आयात बिल बढ़ेगा। खासकर जब वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें सालाना आधार पर 31.25 फीसदी बढ़कर जनवरी, 2025 में 86,464 डॉलर प्रति किलोग्राम पहुंच गई हैं। इसके अलावा, कच्चे तेल, वनस्पति तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कोयला, हीरे, मशीनरी, प्लास्टिक और रसायनों के लिए भी अधिक भुगतान से आयात बिल में बढ़ोतरी होगी।

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आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने शुक्रवार को कहा, वैश्विक बाजार में जिंसों की कीमतें बढ़ रही हैं। रुपये में कमजोरी से आयात बिल के साथ देश में ऊर्जा और कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ेंगी। इससे अर्थव्यवस्था और महंगाई के मोर्चे पर दबाव बढ़ेगा। वह भी ऐसे दौर में जब देश में खपत लगातार घट रही है, जिसका असर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के वृदि्ध दर के आंकड़ों में गिरावट के रूप में दिखा।

एक साल में 4.71 फीसदी टूटी भारतीय मुद्रा
रिपोर्ट के मुताबिक, रुपया 16 जनवरी, 2024 से अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4.71 फीसदी टूटकर 82.8 से 86.7 के स्तर पर आ गया है। पिछले 10 वर्षों में यानी जनवरी, 2015 से 2025 के बीच भारतीय मुद्रा में 41.3 फीसदी की गिरावट आई और यह 61.4 से गिरकर 86.7 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया है।

  • चीनी युआन में 10 वर्षों में 3.24 फीसदी की गिरावट आई और यह 7.10 से घटकर 7.33 युआन रह गया है।

गिरावट थामने में आरबीआई की सीमित भूमिका

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श्रीवास्तव ने कहा, वास्तविक स्थिति गंभीर है। भारत के 600 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा भंडार का अधिकतर हिस्सा का कर्ज/निवेश है। इसका ब्याज सहित भुगतान किया जाना है, जिससे रुपये को स्थिर करने में आरबीआई की भूमिका सीमित हो जाती है।

सुझाव
वृद्धि और महंगाई में बनाना होगा संतुलन

जीटीआरआई ने सुझाव दिया कि भारत को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता हासिल करने के लिए जीडीपी की वृद्धि दर और महंगाई नियंत्रण के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन स्थापित करना होगा। इसके साथ ही, रुपया प्रबंधन और व्यापारिक रणनीतियों पर फिर से विचार करना होगा।

कमजोर रुपये से निर्यात को हमेशा नहीं मिलता है लाभ
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, आम राय के अनुसार कमजोर मुद्रा से निर्यात को बढ़ावा मिलना चाहिए। लेकिन, भारत के बीते 10 वर्षों के आंकड़े विपरीत कहानी बयां कर रहे हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कमजोर रुपये से निर्यात को कोई मदद नहीं मिलती है। हालांकि, उच्च आयात वाले क्षेत्र तेजी से फल-फूल रहे हैं, जबकि कपड़ा जैसे श्रम-गहन और कम आयात वाले उद्योग लड़खड़ा रहे हैं।

  • श्रीवास्तव ने कहा, 2014 से 2024 की अवधि में कुल वस्तु निर्यात 39 फीसदी बढ़ा है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कंप्यूटर जैसे उच्च आयात वाले क्षेत्रों में इससे काफी अधिक बढ़ोतरी देखने को मिली है। 
  • इन प्रवृत्तियों से पता चलता है कि कमजोर रुपया हमेशा निर्यात को बढ़ावा नहीं देता है। यह श्रम-गहन निर्यात को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है और कम मूल्य संवर्धन के साथ आयात संचालित निर्यात को बढ़ावा देता है।
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