भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत वहां से से आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) कृषि उत्पादों को अनुमति देने से भारत पर प्रभाव पड़ेगा। ऐसा होने से यूरोपीय संघ जैसे क्षेत्रों में देश के कृषि निर्यात पर असर पड़ सकता है। आर्थिक थिंक टैंक जीटीआरआई ने शनिवार को इसे लेकर आगाह किया है। भारत और अमेरिका एक अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसकी आधिकारिक घोषणा 9 जुलाई से पहले होने की उम्मीद है।
यूरोपीय संघ में जीएम लेबलिंग के सख्त नियम हैं और जीएम से जुड़े उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं का कड़ा विरोध है। भले ही जीएम फ़ीड की अनुमति है, लेकिन कई यूरोपीय खरीदार पूरी तरह से जीएम-मुक्त आपूर्ति शृंखलाओं को प्राथमिकता देते हैं।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में कृषि-लॉजिस्टिक्स का बिखराव और पृथक्करण संबंधी बुनियादी ढांचे की कमी के कारण क्रॉस-संदूषण की संभावना बनी हुई है, जिससे निर्यात खेपों में जीएम की मौजूदगी का खतरा है।
उन्होंने कहा, "इससे शिपमेंट अस्वीकृत हो सकता है, परीक्षण लागत बढ़ सकती है। भारत की जीएमओ-मुक्त छवि को नुकसान पहुंच सकता है, खासकर चावल, चाय, शहद, मसाले और जैविक खाद्य पदार्थों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में। मजबूत ट्रेसेबिलिटी और लेबलिंग सिस्टम के बिना, जीएम फ़ीड आयात यूरोपीय संघ में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुंचा सकता है।"
उन्होंने कहा, "इनका पेटेंट कराया जाता है और इन्हें ऐसे अनुबंधों के तहत बेचा जाता है, जो इन्हें बचाने और दोबारा लगाने पर रोक लगाते हैं। दोबारा इस्तेमाल किए जाने पर भी कई जीएम फसलें संकर होती हैं और उनके सहेजे गए बीज अक्सर खराब प्रदर्शन करते हैं। भारत में बीटी कॉटन एकमात्र स्वीकृत जीएम फसल है और जब किसानों ने इसके बीजों का दोबारा इस्तेमाल करने की कोशिश की, तो नतीजे घटिया रहे।" इसके अलावा, उन्होंने कहा कि संदूषण का खतरा दुनिया भर में चिंता का विषय बना हुआ है। श्रीवास्तव ने कहा कि जीएम और गैर-जीएम फसलें आपूर्ति शृंखला के विभिन्न बिंदुओं पर, विशेषकर परिवहन, भंडारण या प्रसंस्करण के दौरान, आपस में मिल सकती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में वर्तमान नीति अपेक्षाकृत रूढ़िवादी है और केवल एक जीएम फसल -बीटी कपास- की खेती को मंजूरी दी गई है। जीटीआरआई ने कहा, "किसी भी जीएम खाद्य फसल की व्यावसायिक खेती नहीं की जाती है, हालांकि प्रायोगिक परीक्षण जारी हैं। जीएम सोयाबीन तेल और कैनोला तेल के आयात की अनुमति है।" उन्होंने कहा कि जीएम अनाज, दालों, तिलहन, फलों और इसी तरह के खाद्य/चारा उत्पादों के आयात की अनुमति नहीं है। सोयाबीन भोजन और डीडीजीएस जैसी जीएम फ़ीड सामग्री पर वर्तमान में प्रतिबंध है।