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GST: जीएसटी सुधार से त्योहारों के दौरान उपभोक्ता खपत में वृद्धि की उम्मीद, इक्विटी बाजार को भी मिलेगा फायदा

Thu, 25 Sep 2025 07:33 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

GST: जानकारों का मानना है कि सरकार की ओर से हाल ही में वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) स्लैब में संशोधन कर दो स्लैब (5 से 18 प्रतिशत ) करने से देश में उपभोक्ता खपत को बढ़ावा मिलेगा। उनके अनुसार मध्यम से लंबी अवधि में इक्विटी बाजार के पुनर्मूल्यांकन को भी इससे बढ़ावा मिल सकता है।
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GST - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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सरकार की ओर से हाल ही में वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) स्लैब में संशोधन कर दो स्लैब (5 से 18 प्रतिशत)  करने से देश में उपभोक्ता खपत को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही मध्यम से लंबी अवधि में इससे इक्विटी बाजार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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कम मुद्रास्फीति और स्थिर व्यापक आर्थिक गति के बीच भारत अपनी मजबूत विकास दर को जारी रखे हुए है। अब केंद्र सरकार ने जीएसटी में सुधार को भी अमलीजामा पहना दिया है। जानकारों का मानना है कि सरकार की ओर से हाल ही में वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) स्लैब में संशोधन कर दो स्लैब (5 से 18 प्रतिशत ) करने से देश में उपभोक्ता खपत को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यम से लंबी अवधि में इक्विटी बाजार के पुनर्मूल्यांकन को भी इससे बढ़ावा मिल सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी की दरों में सुधार एक ऐतिहासिक फैसला है। इस कदम से उपभोग से जुड़े हुए क्षेत्रों में मांग तत्काल बढ़ेगी। लेकिन कंपनियों के सामने उच्च कर दरों पर रखी हुई पुरानी इंवेंट्री एक चुनौती की तरह है। यह वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल कंपनियां इससे निपटने के लिए रणनीतियां बना रही हैं। शेयर बाजार पर इसके असर की बात करें तो उतना नहीं जितना उम्मीद की जा रही है।
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कोटक महिंद्रा के एएमसी के ईवीपी और फंड मैनेजर देवेंद्र सिंघल कहते हैं, जीएटी दरों में हालिया संशोधन से मांग को बढ़ावा मिलेगा। जिनमें प्रमुख क्षेत्रों में मांग के स्तर पर उल्लेखनीय बदलाव देखे जा रहे हैं, उनमें दोपहिया वाहन, यात्री कारें और कृषि उपकरण, पैकेज्ड फूड, टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं में मांग बढ़ी है। त्योहारों सीजन में मांग में मजबूत देखने को मिलेगी और इंटरी लेवल के क्षेत्रों में सुधार होने की उम्मीद है। जिन क्षेत्रों में सबसे अधिक कटौती की गई है, उसमें एफएमसीजी, ऑटो, (दोपहिया, यात्री और तिपहिया वाहन)  साथ ही टिकाऊ उपभोक्ता सामान और सीमेंट क्षेत्र की कंपनियों सबसे अधिक लाभ मिलेगा। उनका कहना है, जीएसटी की कर दर को कम करना, साथ ही व्यक्तिगत आयकर कम करने के साथ ब्याज दरों में कटौती यह तीनों ही विकास गति को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे।

शेयर बाजार पर जीएसटी का असर

म्यूचुअल फंड कंपनी दी वेल्थ के उपाध्यक्ष प्रसन्ना पाठक कहते हैं जीएसटी का असर नीचे के स्लैब में अभी देखने को नहीं मिल रहा है, लेकिन बड़े स्लैब यानी 28 से 18 प्रतिशत वाले क्षेत्रों में जिसमें ऑटो सेक्टर में तुरंत असर आया है, वहीं टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की खरीदारी दशहरा और दिवाली पर देखने को मिलेगी। शेयर बाजार की बात करें तो  जीएसटी कटौती का असर बाजार पर सकरात्मक होगा, लेकिन वर्तमान में इसका असर नहीं दिख रहा है। वहीं दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय बाजार में नहीं आ रहे हैं क्योंकि अमेरिकी बाजार आकर्षक बना हुआ है। अमेरिकी टैरिफ के साथ वैश्विक घटानक्रम बाजार की चाल को धीमा कर सकते हैं। वे कहते हैं वर्तमान समय में जीएसटी का असर शेयर बाजार पर उतना नहीं दिखाई दिया है, लेकिन त्योहारी सीजन की मांग और राज्यों के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे स्पष्टता आने पर इसमें तेजी आने की उम्मीद है। अक्टूबर की शुरुआत से त्योहारी सीजन की खरीदारी शुरू हो सकती है, जिसके बाद एफएमसीजी, ऑटो, उपभोक्ता टिकाऊ सामान, होटल जैसे क्षेत्र में तेजी देखने को मिल सकती है।
 

पीएल वेल्थ मैनेजमेंट के सीईओ इंरबीर सिंह जॉली ने कहा भारत संरचनात्मक विकास गाथा सुधारों, जिसमें जीएसटी दरों में संशोधन, पूंजीगत व्यय को गति और कम मुद्रास्फीति के साथ मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। हालांकि टैरिफ संबंधी अनिश्चितता, एफपीआई बाजार से निकलना और कमजोर आय रुझान के साथ वैश्विक अस्थिरता निकट भविष्ट की धारणा पर असर डाल रहे हैं, हमारा मानना है कि निवेशक इस अस्थिरता के मौके का फायदा उठा सकते हैं और सही जगह निवेश कर सकते हैं।

एफएमसीजी सेक्टर पर जीएसटी सुधारों का असर

पीएल कैपिटल के विशेषज्ञ अमनीश अग्रवाल का कहना है, जीएसटी बदलाव के बाद एफएमसीजी कंपनियों के वॉल्यूम ग्रोथ में तेजी देख सकते हैं, जिसमें अगली 3 से 5 तिमाहियों में उच्च एकल अंक से लेकर निम्न दहाई अंक तक की वॉल्यू ग्रोथ हो सकती है। हमारा मानना है कि बेहतर जीएसटी गतिविधियों और बेहतर आपूर्ति श्रृंखला से कीमतों में कटौती का लाभ मिलेगा। हालांकि जुलाई और अगस्त तक मांग स्थिर रही, जबकि सितंबर में अस्थाई मंदी देखी गई क्योंकि अत्यधिक बारिश और जीएसटी दरों में कटौती के कारण खरीदारी में देरी हुई। फिलहाल डीलर आशावादी बने हुए क्योंकि 18 से 5 प्रतिशत जीएसटी वाले एसकेयू पर लगभग 10 से 14 प्रतिशत की कटौती और 12 से 5 प्रतिशत जीएसटभ् वाले एसकेयू पर लगभग 6 से 7 प्रतिशत की कटौती देखते हुए वॉल्यूम में मजबूत उछाल आने की उम्मीद है। वे कहते हैं कंपनियों द्वारा उच्च् कर दरों पर रखे गए पुराने स्टॉक से जुड़े एकमुशत लाभ और हानि का असर झलने की संभावना है, जिसका असर स2026 की दूसरी तिमाही के आंकड़ों पर पड़ सकता है।

उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं कंपनियों के लिए सकरात्मक

टीवी, फ्रिज, एसी और वाशिंग मशीन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की मांग में सुधार होगा। क्योंकि जीएसटी दर में (28 से घटाकर 18 प्रतिशत) कमी आने से उपभोक्ता सामान किफायती होंगे और समय के साथ इनकी पहुंच बढ़ने की संभावना कंपनियों को है। इससे उद्योग ही नहीं रोजर्मरा में इस्तेमाल में आने वाली चीजों पर जीएसटी युक्तिकरण से उपभोक्ता के आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।

होटल और ट्रैवल व लॉजिस्टक उद्योग को फायदा

ट्रैवल उद्योग और होटल चेन को जीएसटी दरों में कटौती का सीधा लाभ होगा, 7,500 रुपये से कम किराय वाले होटल कमरों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगा जो पहले 12 प्रतिशत था। 1,000 रुपये से कम कम वाले होटल अब कर मुक्त होंगे, जबकि 7,500 रुपये अधिक वाले प्रीमियम होटल कमरों पर जीएसटी अब 18 प्रतिशत होगा। मेकमाईट्रिप के सह संस्थापक और सीईओ राजेश मागो का कहना है इस कदम से घरेलू यात्रियों की संख्या में सीधा इजाफा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि लॉजिस्टक में माल वाहनों पर जीएसटी को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। कम लॉजिस्टक लागत का व्यापक प्रभाव संपूर्ण मूल्य दबाव को कम करेगा जिससे मुद्रास्फीति को कम करने में मदद मिलेगी।  

ई-कॉमर्स, सीमेंट और बुनियादी ढांचा

जीएसटी सुधार से ई -कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे स्वगी और जोमेटों जैसे संगठित चैनलों से मांग बढ़ने में उनके कारोबार में वृद्धि होगी जो कि इनके शेयरों में दिखाई देगी। इस क्षेत्र में जीएसटी दरों में कटौती होने से मांग को समर्थन देगी, लेकिन ट्रॉजेक्शन कॉस्ट और पुरानी इंवेंट्री की वजह से कुछ समय के लिए उद्योग के मार्जिन पर दाबव रहेगा। बीमा क्षेत्र को इनपुट टैक्स क्रेडिट की कमी की वह से परेशानी हो सकती है। वहीं एमएसएमई और असंगठित रिटेल क्षेत्र को अनुपालन लागत और प्रतिस्पर्धी दबावों से दो चार होने पड़ सकता है।

प्रसन्ना कहते हैं, अगले पांच वर्षों में जीएसटी कटौती का असर देखने को मिलेगा। जीएसटी से जीडीपी वृद्धि में सालाना आधार पर 2 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। यह अनुपालन को तो सरल बनाएगा साथ कर के बोझ को कम करेगा, इससे उद्योग में प्रतिस्पर्धात बढ़ेगी। हमारा मानना है कि मौजूदा समय में जो वैश्विक परिस्थितियां चल रही है, ऐसे में जीएसटी में कटौती आयकर कटौती, ब्याज दरों में कटौती, कम मुद्रास्फीति और सामान्य मानसून के लाभों  का एक साथ आना भारतीय उपभोक्ता के लिए सोने पर सुहागा होगा।

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