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जून के मुकाबले जुलाई में घटा जीएसटी संग्रह, 87422 करोड़ रुपये आया

Sat, 01 Aug 2020 08:17 PM IST
Rajeev Rai बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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वस्तु एवं सेवा कर - फोटो : iStock
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जीएसटी का संग्रह जून के मुकाबले जुलाई में घट गया। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में शनिवार को बताया कि जुलाई महीने में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का संग्रह जून के 90,917 करोड़ रुपये से घट कर 87,422 करोड़ रुपये पर आ गया। हालांकि, जुलाई का संग्रह मई के 62,009 करोड़ रुपये और अप्रैल के 32,294 करोड़ रुपये से अधिक है। जुलाई में जीएसटी से प्राप्त राजस्व साल भर पहले के समान माह की तुलना में 86 प्रतिशत है। जुलाई 2019 में जीएसटी संग्रह 1.02 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था।

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मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, ‘जुलाई 2020 में सकल जीएसटी राजस्व संग्रह 87,422 करोड़ रुपये रहा, जिसमें केंद्रीय जीएसटी 16,147 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी 21,418 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी 42,592 करोड़ रुपये रहा। एकीकृत जीएसटी में वस्तुओं के आयात पर संग्रहीत 20,324 करोड़ रुपये कर शामिल है। माह के दौरान उपकर से 7,265 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।’ आलोच्य महीने के दौरान सभी प्रमुख राज्यों का जीएसटी संग्रह साल भर पहले की तुलना में 15-20 प्रतिशत कम रहा।

मंत्रालय ने कहा कि हालांकि जुलाई का जीएसटी संग्रह जून की तुलना में अधिक है, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जून में बड़ी संख्या में करदाताओं ने फरवरी, मार्च और अप्रैल 2020 से संबंधित करों का भुगतान किया था। करदाताओं को कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर फरवरी, मार्च और अप्रैल में जीएसटी भुगतान से राहत प्रदान की गयी थी। यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि पांच करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले करदाताओं को सितंबर 2020 तक रिटर्न दायर करने की मोहलत है।
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पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर एवं लीडर (अप्रत्यक्ष कर) प्रतीक जैन ने कहा कि जून और जुलाई के आंकड़ों से पता चलता है कि मोटे तौर पर जीएसटी संग्रह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 85 से 90 फीसदी के स्तर पर चल रहा हैं।

दैनिक आधार पर जारी किए जा रहे ई-वे बिल के आधार पर भी यह संकेत मिलता है कि आपूर्ति श्रृंखला सामान्य स्थिति की ओर लौट रही है, हालांकि आयात अभी भी घरेलू उत्पादन की तुलना में कम है।

जैन ने कहा, ‘कुल मिलाकर, यह सरकार के लिये शुभ संकेत है। लॉकडाउन की पाबंदियों में लगातार ढील दिए जाने से संग्रह में और सुधार होने की संभावना है। उद्योग जगत जीएसटी में शायद कुछ और राहत की उम्मीद कर सकता है, विशेष रूप से नकदी समर्थन के रूप में, क्योंकि वे सुस्ती से गुजर रहे हैं।’

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