जनवरी महीने में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह 12.3 फीसदी बढ़कर 1.96 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह वृद्धि घरेलू आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने के कारण हुई है। सरकारी आंकड़ों में शनिवार को यह जानकारी दी गई।
इसमें घरेलू स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री से राजस्व में 10.4 फीसदी की वृद्धि के 1.47 लाख करोड़ रुपये और आयातित वस्तुओं पर जीएसटी से 19.8 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 48,382 करोड़ रुपये का राजस्व हुआ।
जनवरी 2024 में कुल जीएसटी संग्रह 1,95,506 करोड़ रुपये था, जो उससे पहले के साल (2023) से 12.3 फीसदी अधिक था। इस महीने में 23,853 करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए, जो 24 फीसदी की वृद्धि दिखाता है। रिफंड के बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह 1.72 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 10.9 फीसदी अधिक है।
केपीएमजी के अप्रत्यक्ष कर प्रमुख अभिषेक जैन ने कहा कि जीएसटी संग्रह में लगातार बढ़ोतरी आर्थिक वृद्धि का इशारा कर रही है और व्यवसायों द्वारा कर अनुपालन में सुधार हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि रिफंड की वृद्धि के बावजूद संग्रह में वृद्धि दर्शाती है कि विभाग की रिफंड प्रक्रिया में सुधार हुआ है, जो व्यापार करने में आसानी के लिए एक सकारात्मक कदम है।
डेलॉइट इंडिया के साझेदार एमएस मणि ने बताया कि तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में जीएसटी संग्रह में 10-20 फीसदी वृद्धि हुई है। हालांकि, केंद्र और राज्य के जीएसटी अधिकारियों के लिए चिंता की बात यह है कि कर्नाटक, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे कुछ अन्य बड़े राज्यों में जीएसटी संग्रह में केवल 5-9 फीसदी की वृद्धि हुई है।
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