जब भारत आगे बढ़ता है, तब दुनिया आगे बढ़ती है। जब भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार होता है तो इसका सकारात्मक असर दुनिया पर भी पड़ता है। इसका साफ मतलब यह है कि जब भारत प्रगति करता है तो विश्व के विकास को गति मिलती है। यह बात क्लीन एनर्जी ट्रांसमिशन के क्षेत्र पर भी लागू होता है। भारत शून्य उत्सर्जन के साझा वैश्विक लक्ष्य में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है। जैक्सन ग्रीन के एमडी और सीईओ बिकेश ओगरा के अनुसार केंद्र सरकार और उद्योग जगत के लीडर्स की प्रगतिशील सोच और प्रयासों ने हमें पहले ही क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के रास्ते पर पहले ही मजबूती से स्थापित कर दिया है, उसके बाद हाल ही में घोषित केंद्रीय बजट 2023 ने इसकी गति को आगे बढ़ाने में मदद की है।
देश के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सरकार ने हरित विकास को अगले साल के लिए अपनी प्रमुख बजट प्राथमिकताओं में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में 'हरित विकास' के लिए कई उपायों की घोषणा की है। केंद्रीय बजट में 35,000 करोड़ रुपये के प्रावधान से एनर्जी ट्रांसमिशन और शून्य कार्बन उत्सर्जन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लक्ष्य को गति मिलेगी। वित्त मंत्री ने आगे कई सुधारों की घोषणा की है और अक्षय ऊर्जा उत्पादन के लिए जरूरी गति देने के लिए भविष्य के दृष्टिकोण को निर्धारित किया है।
जब भारत आगे बढ़ता है, तब दुनिया आगे बढ़ती है। जब भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार होता है तो इसका सकारात्मक असर दुनिया पर भी पड़ता है। इसका साफ मतलब यह है कि जब भारत प्रगति करता है तो विश्व के विकास को गति मिलती है। यह बात क्लीन एनर्जी ट्रांसमिशन के क्षेत्र पर भी लागू होता है। भारत शून्य उत्सर्जन के साझा वैश्विक लक्ष्य में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है। जैक्सन ग्रीन के एमडी और सीईओ बिकेश ओगरा के अनुसार केंद्र सरकार और उद्योग जगत के लीडर्स की प्रगतिशील सोच और प्रयासों ने हमें पहले ही क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के रास्ते पर पहले ही मजबूती से स्थापित कर दिया है, उसके बाद हाल ही में घोषित केंद्रीय बजट 2023 ने इसकी गति को आगे बढ़ाने में मदद की है।
हमारा देश सौर ऊर्जा क्षमता से संपन्न है। भारत की जमीन पर इससे लगभग 5,000 ट्रिलियन kWh (किलोवाट-घंटे) ऊर्जा हर साल प्राप्त होती है और देश के ज्यादातर हिस्सों में हर रोज 4-7 kWh प्रति वर्ग मीटर ऊर्जा प्राप्त होती है। इनका बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर, विशेष रूप से देश भर में बड़े अनुकूल दूरस्थ क्षेत्रों में इंस्टॉलेशंस से हम अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में सक्षम हो सकते हैं।
भारत पहले से ही सौर, हाइड्रोजन और बायोगैस के रूप में हरित ऊर्जा के उत्पादन में काफी प्रगति कर रहा है, लेकिन हमें उनकी अधिकतम क्षमता का दोहन करने के लिए नवीन बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की आवश्यकता है। वित्त मंत्री ने इसकी स्पष्ट समझ के साथ 4,000 मेगावाट (मेगावाट घंटे) की क्षमता वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए पीपीपी परियोजनाओं को पूंजीगत सहायता प्रदान करने के लिए अंतर वित्त पोषण तंत्र तैयार करने की घोषणा की है। इसके अलावा, इस घोषणा ने यह भी संकेत दिया है कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से हरित विकास एजेंडा की सहायता के लिए महत्वपूर्ण समर्थन भी प्रदान किया जाएगा, जिसमें पुराने वाहनों को स्क्रैप करने और बदलने, बैटरी भंडारण प्रणालियों को तेज करने, संपीड़ित बायोगैस संयंत्रों की स्थापना और परिवहन के सस्ते साधनों को बढ़ावा देने के लिए तटीय नौवहन को बढ़ावा देने में समर्थन प्रदान करना शामिल है।
केंद्रीय बजट में योजनाओं की लॉन्चिंग और उसके लिए धन आवंटन के बीच संतुलन