भारत से कोल्हापुरी चप्पल का निर्यात हर वर्ष 1 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को यह दावा किया। केंद्रीय मंत्री का यह बयान इटली के फैशन हाउस प्राडा की ओर से दो सरकारी कंपनियों के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के एक दिन बाद आईं। इसमें भारत में निर्मित होने वाली सीमित संस्करण की कोल्हापुरी चप्पल की परियोजना पर सहमति व्यक्त की गई थी।
कुछ महीने पहले प्राडा की जमकर आलोचना हुई, जब यह पता चला था कि उसके कुछ डिजाइन पश्चिमी महाराष्ट्र की पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पलों से प्रेरित थे और कारीगरों को इसका श्रेय नहीं दिया गया था। हंगामे के बाद फैशन हाउस ने तुरंत भारत में अपनी टीमें भेजीं।
गोयल ने पत्रकारों से कहा कि वह प्राडा और कोल्हापुरी चप्पल निर्माताओं के बीच सहयोग से बहुत खुश है। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र के जूते-चप्पलों में वैश्विक ब्रांड बनने की क्षमता है। मैंने हमेशा से यह कल्पना की थी कि कोल्हापुरी चप्पलों का भारत से 1 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात हो और मैं चाहता हूं कि दोनों पक्ष इस क्षमता को हासिल करने के लिए सहयोग करें और काम करें।"
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे अपने बचपन में कोल्हापुरी चप्पलें पहना करते थे। उन्होंने आगे कहा कि एक बार किसी को चमड़े के जूतों की आदत हो जाती है, तो वे कुछ और आजमाने की कोशिश नहीं करते। इटली की प्रमुख फैशन कंपनी प्राडा का कोल्हापुरी सैंडल कलेक्शन फरवरी 2026 में प्राडा के 40 चुनिंदा स्टोर्स और उसके ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लॉन्च होने वाला है।
प्राडा ने बुधवार को मुंबई में इटली के महावाणिज्य दूतावास में एलआईडीकॉम (संत रोहिदास लेदर इंडस्ट्रीज एंड चार्माकर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) और एलआईडीकार (बाबू जगजीवन राम लेदर इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) के साथ कोल्हापुरी चप्पल पर अपने काम के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
एक बयान में कहा गया है कि इटली के उप प्रधानमंत्री एंटोनियो ताजानी की मुंबई यात्रा की पूर्व संध्या पर हुए इस समझौते के परिणामस्वरूप सीमित संस्करण के सैंडल का एक संग्रह तैयार किया जाएगा, जिसका निर्माण भारत में महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुशल कारीगरों के सहयोग से किया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से संचालित एलआईडीकॉम की प्रबंध निदेशक प्रेरणा देशभ्रता ने कहा, "प्राडा के साथ यह सहयोग एक नैतिक साझेदारी को दर्शाता है, जहां एक वैश्विक ब्रांड महाराष्ट्र और कर्नाटक के कारीगरों के साथ सीधे काम करता है, उनकी विशेषज्ञता को पहचानता है और उन्हें पूरा श्रेय देता है।"