किसी भी देश की आर्थिक वृद्धि के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी कारोबार सुगमता बेहद महत्वपूर्ण होता है। 2014 से 2019 के बीच भारत ने विश्व बैंक की कारोबारी सुगमता रैंकिंग में काफी सुधार किया है। अब कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए भारत सरकार 15 फरवरी से नया फॉर्म लागू करने जा रही है। सरकार नई कंपनियों के गठन के लिए एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म लागू करेगी। इस इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म के तहत कंपनी को ईपीएफओ (EPFO) और ईएसआईसी (ESIC) पंजीकरण संख्या तत्काल आवंटित कर दी जाएगी।
शुरू होने जा रहा है ‘स्पाइसईप्लस’ ई-फॉर्म
बता दें कि कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय 10 सेवाओं की पेशकश के लिए ‘स्पाइसईप्लस’ नाम से ई-फॉर्म शुरू करने जा रहा है। मौजूदा समय में मंत्रालय का इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म स्पाइस ( यानी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से कंपनी के गठन का सरलीकृत प्रारूप) है। अब स्पाइस प्लस इसका स्थान लेगा।
नए फॉर्म के होंगे ये फायदे
इस संदर्भ में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने सार्वजनिक सूचना जारी करते हुए कहा कि इस नए फॉर्म के जरिए दी जाने वाली 10 सेवाओं की पेशकश से देश में कारोबार शुरू करने के लिए प्रक्रियाओं में कमी आएगी, समय की बचत होगी और साथ ही लागत भी घटेगी।
होंगे ये फायदे
श्रम मंत्रालय, वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग और महाराष्ट्र सरकार इस फॉर्म के जरिए कुछ और सेवाएं भी पेश करने जा रही हैं। बता दें कि महाराष्ट्र में 15 फरवरी से गठित कंपनियों के लिए पेशेवर कर के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। फॉर्म के जरिए स्थायी खाता संख्या (पैन कार्ड), कर कटौती और संग्रह खाता संख्या (टैन), आदि का काम किया जाएगा। इतना ही नहीं, अगर निदेशक पहचान संख्या (डिन) और जीएसटीआईएन के लिए आवेदन करता है, तो उसके लिए भी आवंटन किया जाएगा।
63वें स्थान पर भारत
बता दें कि विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रैंकिंग 2020 में भारत ने कारोबार सुगमता के मामले में 14 पायदान की छलांग लगाई थी। इस सूची में भारत का 63वें स्थान है। वहीं सऊदी अरब 62वें और यूक्रेन 64वें पायदान पर है। इस सूची में किसी भी देश को चार प्रमुख क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए रैंक दी जाती है।