निजीकरण सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यही वजह है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की चुनिंदा कंपनियों (पीएसयू) में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 51 फीसदी से भी कम करने की योजना बना रही है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ‘बेचने लायक’ कंपनियों के मामले में ऐसा करेगी।
सरकार को पीएसयू कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम करने के लिए कानूनों में संशोधन करने होंगे और सुनिश्चित करना होगा कि ये कंपनियां केंद्रीय सतर्कता आयोग और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की निगरानी के दायरे से बाहर रहें।
अधिकारी ने कहा कि कैबिनेट ने पूर्व में पीएसयू कंपनियों में कम से कम 51 फीसदी हिस्सेदारी रखने का फैसला किया था और अब कैबिनेट को ही हिस्सेदारी इस स्तर से नीचे ले जाने पर फैसला करना होगा। उन्होंने कहा, ‘सरकार चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उपक्रमों (सीपीएसई) में हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम करने का प्रस्ताव/योजना तैयार कर रही है।’ अधिकारी ने कहा कि यह संभव है, लेकिन इसके लिए कंपनी कानून की धारा 241 में संशोधन की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि अगले तीन-चार साल के लिए निजीकरण सरकार की ‘शीर्ष प्राथमिकता’ है। उन्होंने कहा, ‘हमें प्रधानमंत्री से पूरा समर्थन है। इस समर्थन के साथ मुझे 100 फीसदी भरोसा है कि जो भी बेचने लायक है उसे बेच दिया जाएगा और जो बेचने लायक नहीं है उसके लिए कोशिश की जाएगी।’
पवन हंस के विनिवेश में देरी
सरकार पवन हंस के विनिवेश के लिए आवेदन (ईओआई) जमा करने की समयसीमा तीसरी बार बढ़ाकर 10 अक्तूबर कर दी है। ईओआई जमा करने की समयसीमा गुरुवार को ही खत्म हो गई सरकार हेलिकॉप्टर कंपनी को बेचने की योजना बना रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी नोटिस के मुताबिक, पवन हंस के रणनीतिक विनिवेश की समयसीमा बढ़ाकर 10 अक्तूबर कर दी गई है।