मुंबई में न्यू इंडिया को ऑपरेटिव बैंक के बाहर जुटी लोगों की भीड़।
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सरकार जमा बीमा योजना (डीआईसीजीसी) की सीमा को 5 लाख रुपये से अधिक करने पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने सोमवार को यह जानकारी दी। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान संकटग्रस्त न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक के बारे में पूछे जाने पर शीर्ष अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा, "जब भी सरकार मंजूरी देगी, हम इसे अधिसूचित करेंगे। यह सरकार के पास विचाराधीन है।" सचिव ने दोहराया कि जमा बीमा बढ़ाने पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है।
जमा बीमा के जिस रूप में हम आज जानते हैं, भारत में 1962 में शुरू किया गया था। भारत ऐसी योजना शुरू करने वाला दुनिया का दूसरा देश था, भारत से पहले अमेरिका ने 1933 में ऐसा किया था। दुनिया भर में बैंकिंग संकट और बैंक विफलताओं ने जमाकर्ता सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है।
इसके अलावा, नागराजू ने मुंबई मुख्यालय वाले बैंक की स्थिति पर टिप्पणी करने से परहेज किया, जो फिलहाल गहरे संकट में है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव ने कहा, "आरबीआई इस मामले से अवगत है... हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं करने जा रहे हैं।"
बैंकों के खस्ताहाल होने की स्थिति में पात्र जमाकर्ता उचित सत्यापन के बाद जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (DICGC) से 5 लाख रुपये की मौद्रिक सीमा तक अपनी जमा राशि पर जमा बीमा दावा राशि हासिल करने के हकदार होते हैं। इससे 4 फरवरी, 2020 से, DICGC ने जमाकर्ताओं के लिए बीमा कवर की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है। न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक के मामले में जमाकर्ताओं को अधिक जानकारी के लिए बैंक अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी गई है। इसका विवरण DICGC की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से सहकारिता बैंक पर कई प्रतिबंध लगाने के एक दिन बाद, 14 फरवरी को, भारतीय रिजर्व बैंक ने न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई के निदेशक मंडल को 12 महीने की अवधि के लिए हटा दिया था।