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बेतुके बयानों पर सरकार सिखाएगी मलयेशिया को सबक, पाम तेल आयात पर लग सकती है रोक

Tue, 07 Jan 2020 08:07 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

भारत सरकार पाम तेल के आयात पर रोक लगाकर मलयेशिया को सबक सिखाना चाहती है। 
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रिफाइंड-पाम आयल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र सरकार मलयेशिया से पाम तेल की खरीद पर रोक लगाने की तैयारी में है। सरकार एवं उद्योग सूत्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद मलयेशिया ने पाकिस्तान का साथ देते हुए भारत के इस कदम की आलोचना की थी। इसके अलावा, नए नागरिकता कानून पर भी बेतुका बयान दिया था। इस पर भारत सरकार पाम तेल के आयात पर रोक लगाकर मलयेशिया को सबक सिखाना चाहती है। 

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इस संबंध में सरकार ने पाम तेल रिफाइनरी कंपनियों और कारोबारियों से अनौपचारिक रूप से कहा है कि वे मलयेशिया से पाम तेल आयात न करें। दुनिया का सबसे बड़ा पाम तेल खरीदार भारत अगर मलयेशिया से आयात नहीं करता है तो वहां इसके स्टॉक में बढ़ोतरी होगी, जिससे कीमतों में गिरावट आ सकती है।

उद्योग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सोमवार को नई दिल्ली में उद्योग जगत के करीब 24 अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसमें मयलेशिया से पाम तेल की खरीद करने से बचने को कहा गया। वहीं, एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि केंद्र और उद्योग जगत के बीच इस मुद्दे पर कई बैठकें हो चुकी हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। 

ऑयलमील के निर्यात में 79 फीसदी की भारी गिरावट

सोयाबीन खली के निर्यात में भारी गिरावट की वजह से देश से दिसंबर में ऑयलमील का निर्यात 79.20 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 67,562 टन रह गया। दिसंबर, 2018 में 3,24,927 टन ऑयलमील का निर्यात किया गया था। तेल उद्योगों के प्रमुख संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने मंगलवार को कहा कि भारतीय सोयाबीन ऑयलमील के दाम ऊंचे होने के कारण मांग कमजोर रही।

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उसके अनुसार, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि में ऑयलमील का कुल निर्यात 25 फीसदी घटकर 18.02 लाख टन रहा, जबकि एक साल पहले यह निर्यात 24.11 लाख टन रहा था। एसईए ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य अधिक होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में घरेलू सोयाबीन खली अन्य देशों के मुकाबले महंगी पड़ती है, जिससे इसका निर्यात घटा है। 

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