निजीकरण को बड़ा गेमचेंजर मानने वाली सरकार लगातार चौथी बार विनिवेश लक्ष्य से चूक सकती है। विनिवेश के मोर्चे पर प्रतिकूल वैश्विक आर्थिक हालात के अलावा निवेशकों की सुस्त प्रतिक्रिया, कर्मचारी संघों के आंदोलन और कानूनी बाधाओं जैसी अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इससे सरकार कई कंपनियों के निजीकरण में सफल रही है, जबकि कई कंपनियों के मोर्चे पर असफलता हाथ लगी है।
इनमें मिली सफतला
सरकार चालू वित्त वर्ष में अब तक ओएनजीसी, एलआईसी, पीपीएल, गेल, एनआईएनएल, आईआरसीटीसी और अन्य में हिस्सेदारी बेचकर 31,106.40 करोड़ जुटा चुकी है।
टालनी पड़ी योजना