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तेल-शैंपू के शैसे और छोटे पैक पर लग सकता है प्रतिबंध, इनसे जहरीली हो रही मिट्टी

Thu, 03 Oct 2019 01:59 AM IST
paliwal पालीवाल शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एफएमसीजी उद्योग की बिक्री में बड़ी भूमिका निभाने वाले शैसे और छोटे पैक पर सरकार प्रतिबंध लगा सकती है। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एक सर्वे रिपोर्ट में बताया है कि खाली शैसे की रिसाइकलिंग काफी कम होती है, जिससे यह अन्य प्लास्टिक के मुकाबले मिट्टी को ज्यादा जहरीला बना रहा है। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग नहीं करने के आह्वान के बाद खाद्य मंत्रालय इस दिशा में सक्रिय हो गया है और माकूल कदम उठाने से पहले अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर रहा है। इस बीच आई एफएमसीजी उत्पादों की शैसे पैकिंग की वजह से प्रदूषित हो रही मिट्टी की रिपोर्ट देखकर अधिकारी भौचक रह गए और मामले को सचिव व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के संज्ञान में लाया गया।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शैसे पैक के दुष्परिणाम की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। महज 1 फीसदी शैसे या छोटे पैक ही रिसाइकिल हो पाते हैं। चाहे शहर हो या गांव, कहीं भी कचरा बीनने वाले खाली शैसे या छोटे पैक के रैपर नहीं उठाते। इस कारण यह मिट्टी में दबे रह जाते हैं और उपजाऊ जमीन जहरीली हो रही है। 

शैसे पर टिका है एफएमसीजी उद्योग

शैसे और छोटे पैक भले ही एक रुपये से 10 रुपये के बीच बिक रहे हों, लेकिन यही एफएमसीजी कंपनियों के लिए प्राण वायु बने हुए हैं। शैंपू और सुगंधित तेल आदि में देखें तो 70 फीसदी से ज्यादा बिक्री इसी मूल्य वर्ग की पैकिंग में हो रही है। बिस्कुट में भी 70 फीसदी हिस्सा छोटी पैकिंग का है, तो आलू चिप्स में 78 फीसदी, साबुन में 25 फीसदी, टूथ पेस्ट में 25 फीसदी और चॉकलेट में 50 फीसदी छोटी पैकिंग की हिस्सेदारी है। ऐसे में कहा जा सकता है कि एफएमसीजी उद्योग इन्हीं शैसे और छोटे पैक पर टिका हुआ है। 

उद्योगों को भी होती है आसानी

एक प्रमुख एफएमसीजी कंपनी के वरिष्ठ विपणन अधिकारी का कहना है कि शैसे और छोटे पैक में उत्पादों को रखना तो आसान होती ही है, इसका वितरण भी सरलता से हो जाता है। यही नहीं छोटे पैक में ज्यादातर सस्ते प्लास्टिक का उपयोग होता है और इसकी पैकिंग आकर्षक नहीं हो तो भी बिक्री निकल पड़ती है। एक-दो रुपये का शैसे ग्राहकों के लिए भी ठीक होता है और दुकानदारों को भी ज्यादा पूंजी नहीं फंसानी पड़ती है।

विकल्प से पहले नहीं लगे प्रतिबंध

उद्योग संगठन सीआईआई का कहना है कि चाहे छोटी पैकिंग हो या बड़ी, जब तक प्लास्टिक या मल्टीलेयर प्लास्टिक का सुरक्षित विकल्प नहीं आ जाता है, तब तक इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए। इसके लिए उद्योग जगत को कुछ वक्त भी चाहिए। इस प्रतिबंध से उद्योगों को तो नुकसान होगा ही, उपभोक्ताओं पर भी इसका काफी असर होगा। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए इन उत्पादों के इस्तेमाल का खर्च बढ़ जाएगा।

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