वित्त मंत्रालय कुछ महीनों से भारतीय रिजर्व बैंक के साथ इस मामले पर चर्चा कर रहा है। प्रस्ताव को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। भारत के बैंकिंग उद्योग में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। दुबई के एमिरेट्स एनबीडी ने हाल में करीब 27,000 करोड़ रुपये (3 अरब डॉलर) में आरबीएल बैंक में 60 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई है। जापान के सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्प ने करीब 17,000 करोड़ रुपये में यस बैंक में 25 फीसदी हिस्सा खरीदा है।
सरकारी बैंकों में विदेशी स्वामित्व की सीमा बढ़ाने से उन्हें आने वाले वर्षों में और अधिक पूंजी हासिल करने में मदद मिलेगी। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर पिछले तीन वित्त वर्षों में औसतन 8 फीसदी की रही है। ऋण की मांग में भी तेजी आई है। इससे देश के ऋणदाताओं का आकर्षण बढ़ा है। जनवरी से सितंबर के बीच भारत के वित्तीय क्षेत्र में सौदे 127 फीसदी बढ़कर 8 अरब डॉलर हो गए।
सीमा बढ़ाने से यह भी बदलाव होंगे
बैंकों के बोर्ड में विदेशी कंपनियों के भी अधिकारी होंगे। निवेश आने से बैकोंं को विस्तार करने में मदद मिलेगी। वैश्विक स्तर पर उनकी पहुंच आसान होगा।
शेयर 4 फीसदी से ज्यादा चढ़े
इस खबर के बाद सोमवार के कारोबारी सत्र में निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 3.02 फीसदी बढ़कर 8053 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अंत में 2.22 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। सरकारी बैंकों के शेयर 4.48 फीसदी तक बढ़ गए। एसबीआई का शेयर 2.08 फीसदी, पीएनबी का 2.48 फीसदी, केनरा का 2.78 फीसदी, बैंक ऑफ बड़ौदा का 2.87 फीसदी, यूनियन बैंक का 2.08 फीसदी और बैंक ऑफ इंडिया का शेयर 4.48 फीसदी चढ़कर बंद हुआ।
शीर्ष बैंकों में सरकार का हिस्सा
- भारतीय स्टेट बैंक 55.50 फीसदी
- पंजाब नेशनल 70.08 फीसदी
- केनरा बैंक 62.93 फीसदी
- बैंक ऑफ बड़ौदा 63.97 फीसदी
- यूनियन बैंक 74.76 फीसदी
- बैंक ऑफ इंडिया 73.38 फीसदी
- बैंक ऑफ महाराष्ट्र 79.60 फीसदी
- सेंट्रल बैंक 89.27 फीसदी