जेटली ने कहा कि एनसीएलटी उच्च विश्वसनीयता के लिहाज से भरोसेमंद फोरम बन गया है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को दिवालिया बनाने की कगार पर ले जाने वाले लोगों को बोर्ड से बाहर हो रहे हैं। ईमानदार और पारदर्शी प्रक्रिया से नए प्रबंधन का चयन किया गया है।
ऐसे मामलों में कोई राजनीतिक या सरकारी दखलंदाजी नहीं की गई है। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि एनसीएलटी के आंकड़ों के अनुसार, एनसीएलटी की ओर से सुनवाई करने से पहले निपट चुके 4,452 मामलों से 2.02 लाख करोड़ रुपये की राशि का वसूले जाने का अनुमान है।
बैंकों ने अंधाधुंध कर्ज बांटा
वित्त मंत्री ने कहा कि एनपीए के मानक खातों में तब्दील होने की गति तेज हुई है। एनपीए श्रेणी के नए खातों में कमी आ रही है। इससे पता चलता है कि कर्ज देने और उधार लेने के व्यवहार में निश्चित तौर पर सुधार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि 2008 से 2014 के दौरान बैंकों ने ‘अंधाधुंध’ कर्ज बांटा। इस कारण एनपीए का प्रतिशत काफी ऊंचा हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा से यह तथ्य सामने आया है।