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सरकार ऐसे करेगी कर्ज की वसूली, जेटली ने दिए संकेत

Thu, 03 Jan 2019 05:36 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

  • 70,000 करोड़ रुपये की और वसूली हो सकती है मार्च अंत तक
  • जेटली ने कांग्रेस पर लगाया वाणिज्यिक दिवाला मामलों के निपटान में ‘पुरातन प्रणाली’ को विरासत में छोड़ने का आरोप
  • एनडीए सरकार ने एनपीए वसूली की दिशा में की तेज कार्रवाई, आईबीसी संहिता भी बनाई 
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- फोटो : pti
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विस्तार
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा 66 मामलों को सुलझाए जाने से बैंकों (ऋणदाताओं) को करीब 80,000 करोड़ रुपये वसूलने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि मार्च अंत तक करीब 70,000 करोड़ रुपये की और ऋण वसूली हो सकती है।

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कांग्रेस पर वाणिज्यिक दिवाला मामलों के निपटान में ‘पुरातन प्रणाली’ को विरासत में छोड़ने का आरोप लगाते हुए जेटली ने कहा कि एनडीए सरकार ने गैर-निष्पादित कर्जों (एनपीए) को वसूलने की दिशा में तेजी से कार्रवाई की। इस क्रम में दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता (आईबीसी) संहिता भी बनाई। 

1,322 मामले सुनवाई के लिए स्वीकार

जेटली के मुताबिक, 2016 के अंत से एनसीएलटी ने कॉरपोरेट दिवाला मामलों को अपने हाथ में लेना शुरू किया है। तब से लेकर अब तक उसने 1,322 मामले सुनवाई के लिए स्वीकार किए हैं। 4,452 मामलों का निपटान एनसीएलटी की ओर से सुनवाई करने से पहले ही हो गया। 66 मामलों का हल निकाला जा चुका है, जबकि 266 मामलों में डिफॉल्टरों की संपत्ति बेचकर वसूली के आदेश दिए गए हैं।

12 बड़े मामलों का निपटान आखिरी चरण में

वित्त मंत्री ने ‘दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता के दो साल’ शीर्षक वाली अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि 66 मामलों के निपटान से ऋणदाताओं ने 80,000 करोड़ रुपये वसूले। भूषण पावर एंड स्टील और एस्सार स्टील जैसे 12 बड़े मामले निपटान के आखिरी चरण में हैं। इनका निपटारा इसी वित्त वर्ष में होने की उम्मीद है। इससे बैंकों को करीब 70,000 करोड़ रुपये की ऋण वसूली होगी।
 

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भरोसेमंद फोरम बना एनसीएलटी 

NPA
जेटली ने कहा कि एनसीएलटी उच्च विश्वसनीयता के लिहाज से भरोसेमंद फोरम बन गया है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को दिवालिया बनाने की कगार पर ले जाने वाले लोगों को बोर्ड से बाहर हो रहे हैं। ईमानदार और पारदर्शी प्रक्रिया से नए प्रबंधन का चयन किया गया है।

ऐसे मामलों में कोई राजनीतिक या सरकारी दखलंदाजी नहीं की गई है। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि एनसीएलटी के आंकड़ों के अनुसार, एनसीएलटी की ओर से सुनवाई करने से पहले निपट चुके 4,452 मामलों से 2.02 लाख करोड़ रुपये की राशि का वसूले जाने का अनुमान है। 

बैंकों ने अंधाधुंध कर्ज बांटा 

वित्त मंत्री ने कहा कि एनपीए के मानक खातों में तब्दील होने की गति तेज हुई है। एनपीए श्रेणी के नए खातों में कमी आ रही है। इससे पता चलता है कि कर्ज देने और उधार लेने के व्यवहार में निश्चित तौर पर सुधार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि 2008 से 2014 के दौरान बैंकों ने ‘अंधाधुंध’ कर्ज बांटा। इस कारण एनपीए का प्रतिशत काफी ऊंचा हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा से यह तथ्य सामने आया है।
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