भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग को जारी रखते हुए केंद्र सरकार ने शुक्रवार को आयकर विभाग के 15 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया है। यह सभी अधिकारी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में कार्य कर रहे थे।
इन सभी अधिकारियों को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। जिन लोगों को रिटायर किया गया है उनमें आयकर विभाग के प्रधान आयुक्त से लेकर के सहायक आयुक्त तक शामिल हैं। जून के बाद से यह चौथा मौका है जब अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्ति दी गई है। इससे पहले के तीन चरणों में 49 उच्च रैंकिंग वाले अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्ति दी गई थी।
केंद्र सरकार ने इन अधिकारियों को हटाने के लिए नियम 56 (जे) का इस्तेमाल किया है। इस नियम के तहत सरकार किसी भी अधिकारी को जनता की सुविधा के लिए पदमुक्त कर सकती है। इस नियम के तहत जो भी अधिकारी 35 साल की उम्र से पहले सेवा में आए थे और 50 साल पूरे कर चुके हैं या जो अधिकारी 55 साल के हो चुके हैं अथवा 30 साल की सेवा दे चुके हैं उनके कार्यों का सरकार तीन से छह माह के अंतराल पर रिव्यू करती है। रिव्यू के आधार पर इनकी नौकरी आगे जारी रखने के बारे में फैसला ले सकती है।
जिन लोगों को सरकार ने सेवाओं से कार्यमुक्त किया है उनके नाम इस प्रकार हैं :