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सरकार का लक्ष्य: अप्रैल में पेश हो सकता है एलआईसी आईपीओ, बाजार में अस्थिरता के चलते मार्च में आना मुश्किल

Tue, 15 Mar 2022 12:14 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Govt Aims To Launch LIC IPO In April: एक रिपोर्ट में दो सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि सरकार का लक्ष्य देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी के आईपीओ को अप्रैल के मध्य तक पेश करने का है। बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के कारण पहले ने निर्धारित 31 मार्च से पहले आईपीओ पेश होने की संभावना बेहद कम है। 
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एलआईसी
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विस्तार
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देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी के आईपीओ को लेकर लगातार चर्चाओं का बाजार गर्म है। सोमवार को आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के चलते सरकार आईपीओ को टाल सकती है। वहीं अब आई एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सरकार ने एलआईसी आईपीओ को पेश करने के लिए अप्रैल मध्य का समय निर्धारित किया है। 

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बाजार में उतार-चढ़ाव से धारणाएं प्रभावित
रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयर बाजार में जारी अस्थिरता के माहौल के चलते पहले से निर्धारित यानी 31 मार्च तक एलआईसी का आईपीओ पेश होने की संभावना कम ही दिख रही है। क्योंकि बीते फरवरी महीने से रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले के बाद से वैश्विक बाजारों के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसके चलते विदेशी निवेशकों की धारणाओं पर गहरा असर हुआ है। यही कारण है कि सरकार मार्च में इसे पेश करने पर पुर्नविचार कर रही है। 

सरकार की बाजार पर पैनी नजर 
लिस्टिंग योजनाओं की सीधी जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस उथल-पुथल के बीच सबसे अधिक संभावना बन रही है कि एलआईसी अब अप्रैल के मध्य तक सूचीबद्ध हो सकती है। उन्होंने कहा कि हम बाजार पर नजर बनाए हुए हैं और स्थितियों को करीब से देख रहे हैं। जो हालात सामने दिख रहे हैं उन्हें देखते हुए तय समय पर आईपीओ लॉन्च करना मुश्किल नजर आ रहा है। गौरतलब है कि सरकार ने 31 मार्च से पहले आईपीओ लॉन्च करने की योजना बनाई थी, लेकिन यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद इसमें रुकावट की संभावन बढ़ गई है।
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एलआईसी में 20% एफडीआई अधिसूचित
डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) ने आईपीओ-बाउंड भारतीय जीवन बीमा निगम में 20 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने के सरकार के फैसले को सोमवार को अधिसूचित किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी के विनिवेश के फैसले को मंजूरी दी थी। कैबिनेट ने एलआईसी में ऑटोमेटिक रूट से 20 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी पर मुहर लगाई गई थी। इस निर्णय के बाद एलआईसी में विदेशी निवेश का रास्ता साफ हो गया है। 

सेबी से मिल चुकी है मंजूरी 
बता दें कि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी के आईपीओ को बाजार नियामक सेबी की मंजूरी मिल चुकी है। भारतीय जीवन बीमा निगम को आईपीओ के जरिए फंड जुटाने के लिए सेबी ने 9 मार्च को हरी झंडी दिखाई थी। इसके बाद उम्मीद थी कि आईपीओ सरकार द्वारा निर्धारित तारीख को लॉन्च हो जाएगा। सरकार की ओर से बीती 13 फरवरी को सेबी के पास डीआरएचपी यानी आईपीओ प्रस्ताव जमा किया गया था। सेबी के पास दायर ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) के अनुसार, सरकार चालू वित्त वर्ष में 78,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए जीवन बीमा फर्म में 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी। 

10 फीसदी हिस्सा पॉलिसीधारकों के लिए
दस्तावेजों के अनुसार, एलआई के आईपीओ का एक हिस्सा एंकर निवेशकों के लिए आरक्षित होगा। इसके अलावा एलआईसी आईपीओ इश्यू साइज का 10 फीसदी तक पॉलिसीधारकों के लिए और पांच फीसदी कर्मचारियों के लिए आरक्षित होगा। बता दें कि एलआईसी का ये आईपीओ देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। 

पूरी तरह ऑफर फॉर सेल आईपीओ
एलआईसी का ये आईपीओ अब तक सबसे बड़ा आईपीओ होगा। सेबी में सौंपे गए डीआरएपी के अनुसार, एलआईसी का इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा। इसमें सरकार अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी के अंतर्गत 31.6 करोड़ शेयर जारी करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिसाब से कंपनी की एम्बेडेड वैल्यू 5.4 लाख करोड़ रुपये होगी। अमूमन किसी बीमा कंपनी का मार्केट कैप इस वैल्यू का चार गुना होता है। इस हिसाब से देखें तो एलआईसी की मार्केट वैल्यू 288 अरब डॉलर यानी करीब 22 लाख करोड़ रुपये होगी और एलआईसी देश की सबसे बड़ी मूल्यवान कंपनी बन जाएगी। 

20 फीसदी एफडीआई को मंजूरी
गौरतलब है कि बीते दिनों हुई कैबिनेट की बैठक में एलआईसी आईपीओ को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया था। दरअसल, आईपीओ-बाउंड एलआईसी में एफडीआई की अनुमति दे दी गई थी। बैठक में एलआईसी में ऑटोमेटिक रूट से 20 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी पर मुहर लगाई गई थी। इस फैसले के बाद एलआई के प्रस्तावित आईपीओ में विदेशी निवेश का रास्ता खुल गया है। 

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