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Chrome Deal: 300 करोड़ यूजर्स तक पहुंच बनाने का रास्ता बनेगा गूगल क्रोम; परप्लेक्सिटी की भी नजर, जानिए सबकुछ

Thu, 14 Aug 2025 05:33 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गूगल क्रोम को लेकर टेक दिग्गजों में होड़ मची है। परप्लेक्सिटी की नजर भी क्रोम पर है। हालांकि, गूगल ने अभी क्रोम को बिक्री के लिए नहीं रखा है, लेकिन चल रही एंटीट्रस्ट कार्यवाही इसके पैरेंट कंपनी Alphabet को संभावित खरीदार तलाशने के लिए मजबूर कर सकती है।
 
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गूगल क्रोम और परप्लेक्सिटी - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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परप्लेक्सिटी एआई इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कंपनी ने गूगल के क्रोम ब्राउजर को 34.5 अरब डॉलर में खरीदने का प्रस्ताव दिया है। यह कीमत परप्लेक्सिटी के मूल्यांकन से लगभग दोगुना है। जुलाई में कंपनी का मूल्य 18 अरब डॉलर बताया गया। इस एआई स्टार्टअप का कहना है कि कई निवेशक पहले ही इस सौदे के वित्तपोषण के लिए प्रतिबद्ध हो चुके हैं। 

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परप्लेक्सिटी क्रोम को क्यों खरीदना चाहती है?
एआई-संचालित वेब सर्च इंजन पेरप्लेक्सिटी क्रोम को इसलिए खरीदना चाहती है क्योंकि यह 300 करोड़ से ज्यादा उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने का रास्ता है। यह गूगल के सर्च साम्राज्य की रीढ़ है और इसके अधिग्रहण से परप्लेक्सिटी को सीधे यूजर व्यवहार, सर्च ट्रैफिक और विज्ञापन डेटा तक पहुंच मिल सकती है।
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फिलहाल परप्लेक्सिटी का खुद का एआई ब्राउजर Comet करीब 1.5 करोड़ मासिक सक्रिय यूजर्स के साथ काम कर रहा है, लेकिन क्रोम के अधिग्रहण से कंपनी दुनिया के सबसे बड़े ब्राउजर की मालिक बन जाएगी और उस इंटरफेस पर नियंत्रण पा लेगी जहां AI-पावर्ड सर्च सीधे यूजर्स से जुड़ता है।

क्या गूगल क्रोम को बेचना चाहती है?
गूगल ने क्रोम को बेचने की कोई योजना घोषित नहीं की है। हालांकि, 2024 में एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने फैसला दिया था कि गूगल ने सर्च में अवैध एकाधिकार बनाया है। अमेरिकी न्याय विभाग क्रोम की बिक्री को इस एकाधिकार के समाधान के रूप में आगे बढ़ा रहा है। इस महीने एक और न्यायाधीश का फैसला आने की संभावना है, जो  गूगल को अपने सर्च बिजनेस को तोड़ने का आदेश दे सकता है।

गूगल ने संकेत दिया है कि वह ऐसे किसी आदेश के खिलाफ अपील करेगा, लेकिन अगर बिक्री के लिए मजबूर किया गया तो कठोर दंड से बचने के लिए कंपनी मान सकती है। हालांकि परप्लेक्सिटी द्वारा दिया गया 34.5 अरब डॉलर का ऑफर, क्रोम के अनुमानित 50 अरब डॉलर के बाजार मूल्य से काफी कम है।

क्रोम को और कौन-कौन खरीदना चाहता है?
गूगल क्रोम के संभावित अधिग्रहण को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। OpenAI, Yahoo और न्यूयॉर्क स्थित प्राइवेट इक्विटी फर्म Apollo Global Management ने भी इसमें रुचि दिखाई है।

OpenAI, क्रोम को एक 'AI-फर्स्ट' ब्राउजिंग अनुभव का लॉन्चपैड मानता है, जिसमें ChatGPT को ब्राउजर के मूल ढांचे में एकीकृत करने की योजना है। Yahoo का लक्ष्य अपने सर्च बिजनेस के पुनरुद्धार को तेज करना है और वह वर्षों की ब्राउजर डेवलपमेंट प्रक्रिया को पीछे छोड़ना चाहता है। वहीं, Apollo Chrome को स्थिर कैश फ्लो और रणनीतिक ताकत वाला एक हाई-वैल्यू एसेट मान रहा है। सभी दावेदार क्रोम को सिर्फ एक वेब ब्राउजर नहीं, बल्कि एआई, सर्च और विज्ञापन के लिए एक शक्तिशाली वितरण मंच के रूप में देख रहे हैं। 

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परप्लेक्सिटी ने गूगल क्रोम को खरीदने का दिया प्रस्ताव - फोटो : amar ujala digital
Perplexity ने टिकटॉक को खरीदने का भी प्रस्ताव दिया था
अमेरिकी एआई कंपनी Perplexity ने जनवरी में टिकटॉक के अमेरिकी परिचालन को खरीदने का प्रस्ताव दिया था। चीन की बाइटडांस के स्वामित्व वाला यह शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म सितंबर तक बिकने या अमेरिका में बैन होने की समयसीमा का सामना कर रहा है।

Perplexity ने टिकटॉक का एल्गोरिद्म शून्य से दोबारा बनाने और उसमें एआई आधारित फैक्ट-चेकिंग को शामिल करने की पेशकश की थी। साथ ही, कंपनी ने कहा था कि प्लेटफॉर्म का पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर अमेरिकी डेटा सेंटरों में होस्ट किया जाएगा और संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, टिकटॉक ने बिक्री को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई और Perplexity का प्रस्ताव ओरेकल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे बड़े बोलीदाताओं के बीच दब गया।

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