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गोल्डमैन सैश का दावा: टैरिफ वार और गहराने से बढ़ेगा जोखिम, साल के अंत तक 38 फीसदी महंगा हो सकता है सोना

Tue, 15 Apr 2025 01:48 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

गोल्डमैन सैश ने दावा किया कि व्यापार युद्ध और वैश्विक मंदी के डर के कारण इस साल के अंत तक सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,500 डॉलर प्रति औंस और भारत में 1.30 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं। 
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सोना-चांदी - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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लगातार नए रिकॉर्ड बना रही सोने की कीमतें व्यापार युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस साल के अंत तक 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच सकती हैं। यह मौजूदा भाव 3,247 डॉलर प्रति औंस से करीब 38 फीसदी अधिक है। यह दावा गोल्डमैन सैश ने किया है। वहीं, कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर के अनुरूप घरेलू बाजार में भी सोने की कीमत इस साल के अंत तक 1.30 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच सकती है।
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गोल्डमैन सैश ने इस साल सोने के दाम के लक्ष्य को तीसरी बार बढ़ाया है। इससे पहले लक्ष्य को बढ़ाकर 3,300 डॉलर प्रति औंस किया था। विदेशी फर्म ने कहा, सामान्य स्थिति में सोना 2025 के अंत तक बढ़कर 3,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। अमेरिकी और चीन के बीच व्यापार युद्ध गहराने से अगर जोखिम बढ़ता है, तो कीमती धातु 4,500 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू सकती है। सोने की कीमतों में पिछले सप्ताह 6.5 फीसदी का उछाल देखने को मिला था, जो कोविड-19 के बाद सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन था।

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कीमतों में इसलिए दिख रही तेजी
गोल्डमैन सैश ने कहा, अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ वार बढ़ने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी की चिंता से सोने की मांग बढ़ गई है।
व्यक्तिगत निवेशकों के अलावा संस्थानों और केंद्रीय बैंकों की ओर से भी बहुमूल्य धातु की मांग बढ़ रही है, जिससे कीमतों को सहारा मिला है।
मंदी के जोखिम, बॉन्ड की ब्याज दरों में वृद्धि और वित्तीय अस्थिरता की चिंता निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित कर रही है।
इस साल की पहली तिमाही में गोल्ड आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में 2020 के बाद से सबसे अधिक निवेश हुआ।
केंद्रीय बैंक डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश में अधिक सोना खरीद रहे हैं।
कटे-तराशे हीरे का निर्यात करीब दो दशक के निचले स्तर पर
देश से कटे एवं तराशे गए हीरे का निर्यात बीते वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर करीब दो दशक के निचले स्तर पर आ गया। उद्योग निकाय ने कहा, अमेरिका और चीन में मांग घटने से निर्यात में बड़ी गिरावट आई है। रत्न-आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के मुताबिक, बीते वित्त वर्ष के दौरान कटे एवं तराशे हीरे का निर्यात 16.8 फीसदी घटकर 13.3 अरब डॉलर रह गया। इससे रत्न-आभूषण निर्यात भी बीते वित्त वर्ष 11.7 फीसदी घटकर 28.5 अरब डॉलर रह गया, जो इसका करीब चार साल का निचला स्तर है।,,,,

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