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सर्राफा बाजार: दिल्ली में सोना 1,500 रुपये टूटा, वैश्विक रुझानों के बीच चांदी स्थिर, जानिए कैसा बाजार का रुझान

Tue, 22 Sep 2026 06:40 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

दिल्ली में सोने की कीमतों में 1,500 रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी स्थिर रही। फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने कीमती धातुओं पर दबाव डाला। निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और ट्रंप-जिनपिंग बैठक पर नजर रख रहे हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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सोने-चांदी का भाव। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार को सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक रुझानों के कारण सोना 1,500 रुपये सस्ता होकर 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। हालांकि, चांदी के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 2.42 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना सभी करों सहित 1,54,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिका।

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सोमवार को सोने का बंद भाव 1,56,400 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जिसमें 1,500 रुपये की कमी आई है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट - कमोडिटीज, सौमिल गांधी ने बताया कि फेडरल रिजर्व के आक्रामक बयानों और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने कीमती धातुओं पर दबाव डाला। डॉलर सूचकांक 100 से ऊपर बना हुआ है, जो जुलाई के अंत के बाद अपने उच्चतम स्तर के करीब है। फेड अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। हालांकि, तेल की कीमतों में और गिरावट से सोने को कुछ समर्थन मिला। इससे मुद्रास्फीति की चिंताएं कम हुईं और अमेरिका-ईरान संघर्ष के संभावित राजनयिक समाधान की उम्मीद बढ़ी। वैश्विक बाजारों में, स्पॉट सोना और चांदी लगभग 1 फीसदी की गिरावट के साथ क्रमशः 4,315.09 अमेरिकी डॉलर और 65.50 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहे थे।

सोने पर क्यों बढ़ा दबाव?

मीराए एसेट शेयरखान के कमोडिटीज प्रमुख प्रवीण सिंह ने बताया कि स्थिर अमेरिकी डॉलर और तेल की कीमतों में उछाल के कारण स्पॉट सोना संघर्ष कर रहा है। पश्चिम एशिया में स्थिति अस्थिर होने से भी बाजार पर असर पड़ा है। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के आक्रामक रुख ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की संभावना ने सोने की मांग को कम किया है। मजबूत अमेरिकी डॉलर भी सोने को महंगा बनाता है, जिससे इसकी खरीद कम होती है।

निवेशकों की नजर किन आर्थिक आंकड़ों पर है?

निवेशक अब अमेरिका के आगामी आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इनमें साप्ताहिक एडीपी रोजगार रिपोर्ट और रिचमंड फेड मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स शामिल हैं। ये आंकड़े केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति पर नए संकेत दे सकते हैं। इन आंकड़ों से ब्याज दरों के भविष्य के रुझान का अनुमान लगाया जा सकेगा। मौद्रिक नीति में किसी भी बदलाव का सोने की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का क्या असर होगा?

व्यापारी गुरुवार को न्यूयॉर्क में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के बीच होने वाली बैठक पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे। इस बैठक में ईरान युद्ध पर भी चर्चा होने की संभावना है। भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों का कीमती धातुओं पर अक्सर प्रभाव पड़ता है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के समाधान की उम्मीदें सोने को कुछ सहारा दे सकती हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया में अस्थिरता सोने के लिए चुनौती बनी हुई है।

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