देश की राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। 26 जनवरी की छुट्टी के बाद जब बाजार खुले, तो कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला। चांदी ने एक ही दिन में 40 हजार रुपये से ज्यादा की छलांग लगाई और 3.70 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई। वहीं, सोना भी 1.66 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नए शिखर पर जा बैठा। बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीतियों और बढ़ते वैश्विक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया है, जिससे यह अभूतपूर्व तेजी आई है।
कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर
- चांदी: चांदी ने सोने को भी पीछे छोड़ दिया है। मंगलवार को इसमें 40,500 रुपये (12.3%) का जबरदस्त उछाल आया और यह 3,70,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) के नए 'लाइफ टाइम हाई' पर पहुंच गई। पिछले सत्र में यह 3,29,500 रुपये पर थी।
- सोना : 99.9% शुद्धता वाला सोना 7,300 रुपये (4.6%) महंगा होकर 1,66,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। शुक्रवार को यह 1,58,700 रुपये पर बंद हुआ था।
वैश्विक बाजार में 5000 डॉलर के पार सोना
ग्लोबल मार्केट में भी सोने ने पहली बार 5,000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया है। सोमवार को यह 5,110.24 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड तक गया था और फिलहाल 5,087.48 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं, चांदी ने भी 100 डॉलर का स्तर पार कर लिया है और यह 112.41 डॉलर प्रति औंस पर चल रही है।
क्यों मची है इतनी खलबली?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस 'सुपर रैली' के पीछे तीन बड़े कारण हैं:
- ट्रंप का 'टैरिफ' बम: मीरा एसेट शेयरखान के प्रवीण सिंह बताते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के साथ ट्रेड डील करने की कोशिश कर रहे कनाडा को 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। इसके अलावा, दक्षिण कोरियाई ऑटोमोबाइल और फार्मा पर टैरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया गया है। इन फैसलों ने बाजारों को डरा दिया है,।
- अनिश्चितता का माहौल: ऑगमोंट की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी का कहना है कि ट्रंप की नीतियों को लेकर अनिश्चितता इस साल कीमती धातुओं की कीमतों का मुख्य ड्राइवर है। एशिया और यूरोप में नए निवेशक आक्रामक रूप से सोना-चांदी जमा कर रहे हैं।
- औद्योगिक मांग: लेमन मार्केट्स डेस्क के गौरव गर्ग के अनुसार, चांदी को निवेश के साथ-साथ मजबूत औद्योगिक मांग का भी सहारा मिल रहा है।
आगे क्या उम्मीद?
जानकारों का मानना है कि डॉलर पर दबाव और वैश्विक जोखिम बने रहने तक सोने-चांदी में तेजी का रुख कायम रह सकता है। हालांकि, मुनाफे की वसूली के चलते बीच-बीच में थोड़ी गिरावट भी देखने को मिल सकती है।