बाजार विशेषज्ञों की राय इससे अलग है। उनका कहना है कि फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, मजबूत डॉलर और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले सप्ताह सोना नवंबर 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। इसके पीछे कई वजहें रहीं।
शनिवार को सोने और चांदी की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। इसकी वजह अमेरिका के महंगाई के आंकड़े रहे। इन आंकड़ों के बाद बाजार में यह उम्मीद बनी कि फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना पहले की तुलना में कम हो सकती है। इसी उम्मीद ने सोने में खरीदारी को कुछ समर्थन दिया।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल दोनों कीमती धातुओं में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना करीब 1.33 लाख रुपये था, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.79 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद कीमतों में गिरावट आई और अब तक सोना लगभग 36 हजार रुपये सस्ता हो चुका है।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि फिलहाल कमोडिटी बाजार सतर्कता के दौर में है। निवेशकों की नजर अमेरिकी मौद्रिक नीति, डॉलर, ट्रेजरी यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई है। मजबूत डॉलर और ऊंची ट्रेजरी यील्ड की वजह से सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हुआ है।
वहीं, कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला का कहना है कि जब तक ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट बदलाव नहीं दिखता, तब तक सोने और चांदी पर दबाव बना रह सकता है। पिछली फेड बैठक के बाद सोने में 5 प्रतिशत से ज्यादा और चांदी में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट इसी का उदाहरण है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के विशेषज्ञ जतिन त्रिवेदी के अनुसार, अब बाजार की नजर अमेरिका के अगले सप्ताह आने वाले नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़ों पर रहेगी। यही आंकड़े तय करेंगे कि डॉलर और सोने की चाल किस दिशा में जाएगी। तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यम अवधि में सोने और चांदी का नजरिया सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने के बजाय आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले संकेतों पर नजर रखना बेहतर रणनीति हो सकती है।