सोने की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 3,300 रुपये टूटकर 1,62,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। गुरुवार को इसका भाव 1,65,700 रुपये प्रति 10 ग्राम था। तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट में सोना 4,700 रुपये यानी करीब तीन फीसदी सस्ता हो चुका है। 25 अगस्त को इसकी कीमत 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।
डॉलर मजबूत, मुनाफावसूली ने बढ़ाया दबाव
एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट- कमोडिटी एंड करेंसी जतिन त्रिवेदी के अनुसार, हालिया तेजी के बाद कारोबारी लगातार तीसरे सत्र में मुनाफावसूली कर रहे हैं। इस बीच अमेरिकी डॉलर भी मजबूत होकर इंडेक्स में 99.15 के स्तर से ऊपर पहुंच गया, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा।
चांदी भी 5,000 रुपये सस्ती
घरेलू बाजार में चांदी भी कमजोर रही। इसकी कीमत 5,000 रुपये गिरकर 2,45,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी का भाव 2,50,500 रुपये प्रति किलोग्राम था। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी के अनुसार, बढ़ती तस्करी के बीच केंद्र सरकार की ओर से सीमा शुल्क में कटौती की खबरों ने भी घरेलू बाजार में सोने पर दबाव बनाया। उनके मुताबिक, इन खबरों से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की कीमतों के बीच अंतर भी बढ़ा।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,600 डॉलर के आसपास सोना
विदेशी बाजार में हाजिर सोना मामूली गिरावट के साथ 4,599.70 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। मिराए एसेट शेयरखान के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह ने कहा कि निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श के भाषण पर है। वह कंसास सिटी में आयोजित जैक्सन होल संगोष्ठी में बोलने वाले हैं।
सिंह के अनुसार, बाजार को उम्मीद है कि वार्श का रुख सख्त रह सकता है। अगर वह निवेशकों को महंगाई और बढ़ी हुई यील्ड को लेकर भरोसा नहीं दिला पाए, तो डॉलर पर दबाव आ सकता है। ऐसी स्थिति में सोने को फिर से मजबूती मिल सकती है। हालांकि, विदेशी बाजार में चांदी ने सोने से अलग रुख दिखाया। हाजिर चांदी 1.51 फीसदी बढ़कर 70.31 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
खरीदारी का सही वक्त या इंतजार?
सोने में तीन दिन की गिरावट के बाद खरीदारी का मौका जरूर बना है, लेकिन पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय थोड़ी-थोड़ी खरीदारी ज्यादा सुरक्षित रणनीति मानी जा सकती है। बाजार अभी फेड चेयरमैन केविन वार्श के भाषण और अमेरिकी मौद्रिक नीति के संकेतों का इंतजार कर रहा है। अगर उनका रुख सख्त रहा और डॉलर मजबूत हुआ तो सोने में और दबाव आ सकता है, जबकि डॉलर कमजोर पड़ने पर कीमतों को फिर सहारा मिल सकता है। हाल के बाजार आकलनों में भी तेजी का पीछा करने के बजाय गिरावट पर चरणबद्ध खरीदारी की सलाह दी गई है।