गुणवत्ता के सिर्फ तीन वर्ग
केंद्रीय मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मसौदे में कहा गया है कि चिकित्सा, दंत चिकित्सा और उद्योग क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली चीजों को अनिवार्य हॉलमार्किंग से छूट प्रदान की गई है। इसके अलावा सोने के पतले धागे, निर्माणाधीन आभूषणों, निर्यात किए जाने वाले सोने, बुलियन और सिक्कों को भी इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
साथ ही 14, 18 और 22 कैरेट सोने के आभूषणों की गुणवत्ता का निर्धारण किया गया है, जबकि इतर गुणवत्ता यानी 15, 16, 17 या 19 कैरेट पर आभूषण मान्य नहीं होंगे। मसौदा नियमों का अनुपालन नहीं करने वालों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान भी शामिल किया गया है, जो भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) अधिनियमों के तहत उल्लंघनकर्ता पर लगाया जाएगा।
पंजीकृत स्वर्णकार को रखना होगा रिकॉर्ड
मौजूदा संशोधित नियमों के तहत पंजीकरण कराने पर स्वर्णकारों को अगले पांच साल तक के लिए एक प्रमाणपत्र मुहैया कराने का प्रावधान है, जिसके लिए 2,000 रुपये की फीस चुकानी होती है। इसके अलावा हरेक पंजीकृत स्वर्णकार को सभी हॉलमार्किंग आभूषण का रिकॉर्ड रखना होगा।
हॉलमार्किंग के सही ना होने की स्थिति में उन्हें पहले चरण में नोटिस जारी किया जाएगा। मौजूदा नियमों में हॉलमार्किंग केंद्र खोलने के लिए स्वर्णकारों को 10,000 रुपये का शुल्क देना होगा। यह केंद्र हरेक आभूषण पर 35 रुपये का शुल्क लेता है।