संकट से जूझ रही गो फर्स्ट ने एनसीएलटी (राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण) से अपील की है कि उनकी स्वैच्छिक दिवाला समाधान याचिका पर जल्द फैसला किया जाए। वहीं कंपनी के दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद पट्टेदारों ने एयरलाइन के विमानों का पंजीकरण रद्द करना शुरू कर दिया है। एनसीएलटी ने बीती चार मई को गो फर्स्ट की याचिका पर सुनवाई कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
एनसीएलटी करेगी विचार
कंपनी की तरफ से एनसीएलटी में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी नागेश ने प्रांजल किशोर के साथ रामलिंगम सुधाकर की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने अपना पक्ष रखा। पीठ ने भी गो फर्स्ट के अनुरोध पर विचार करने की बात कही है।
वित्तीय संकट से जूझ रही एयरलाइन
गो फर्स्ट एयरलाइन बीते 17 सालों से संचालित हो रही है लेकिन फिलहाल कंपनी ने 15 मई तक टिकटों की बिक्री निलंबित कर दी है। कंपनी के 28 विमान ग्राउंडेड हैं। दरअसल इंजन बनाने वाली कंपनी प्रैट विटनी द्वारा इंजनों की सप्लाई ना करने के चलते कंपनी विमानों का संचालन नहीं कर पा रही है। साथ ही कंपनी की वित्तीय स्थिति भी खराब है और कंपनी पर करीब 11,463 करोड़ रुपए की देनदारियां हैं। यही वजह है कि कंपनी ने स्वैच्छिक तौर पर दिवालिया घोषित करने की अपील की है।
गो फर्स्ट के 36 विमानों का पंजीकरण खत्म करने का अनुरोध
वित्तीय संकट की वजह से सप्ताह भर पहले अपनी उड़ानों का परिचालन निलंबित कर देने वाली एयरलाइन गो फर्स्ट को पट्टे पर विमान देने वाली कंपनियों ने अब तक 36 विमानों का पंजीकरण खत्म करने का अनुरोध किया है। एयरलाइन ने सोमवार को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से दिवाला प्रक्रिया शुरू करने की अर्जी पर जल्द फैसला सुनाने का अनुरोध करते हुए कहा कि उसे पट्टे पर विमान देने वाली कंपनियों ने पंजीकरण खत्म कर विमानों को वापस लेने की मांग रखनी शुरू कर दी है।
अनुरोध पर गौर करने पर न्यायाधिकरण सहमत
गो फर्स्ट के बेड़े में शामिल 13 अन्य विमानों को वापस लेने का अनुरोध नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के पास आ चुका है। इसके पहले भी 23 विमानों का पंजीकरण खत्म कर उन्हें वापस लेने की मांग विमान पट्टा कंपनियों ने की थी। इस तरह अब तक कुल 36 विमानों का पंजीकरण खत्म करने की मांग डीजीसीए के पास आ चुकी है। एयरलाइन के इस अनुरोध पर गौर करने पर न्यायाधिकरण ने सहमति जताई।