फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मौसम की मारः भारत ही नहीं, इन एशियाई देशों में भी कम होगी फसल की पैदावार

Tue, 30 Jul 2019 07:46 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
विज्ञापन

विश्व में मौसम की मार के चलते कई यूरोपीय देशों में जहां प्रचंड गर्मी पड़ रही है, वहीं अमेरिका में खूब बारिश हो रही है। भारत में भी जहां कई प्रदेशों में बारिश सामान्य से कम हुई है, वहीं कुछ राज्यों में बाढ़ आ चुकी है। ऐसे में एशिया के तमाम देशों में इस बार फसल की पैदावार कम होने की संभावना है। 

इनकी पैदावार पर पड़ेगा असर

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार इस बार चावल, रबर, पॉम ऑयल और चीनी का उत्पादन कम होने की संभावना है। ऐसे में लोगों के लिए आगे यह वस्तुएं खरीदना महंगा होने जा रहा है, क्योंकि यहां पर इनकी पूरे विश्व में सबसे ज्यादा पैदावार होती है। 

थाईलैंड, इंडोनेशिया में धान की खेती सूखी

थाईलैंड और इंडोनेशिया में सबसे ज्यादा धान की खेती होती है। हालांकि इस बार बारिश कम होने से इन दोनों देशों में इसकी खेती पर असर दिखेगा। इन दो देशों के अलावा मलयेशिया में भी पॉम ऑयल का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है। अगले तीन महीने बहुत ही विकट हैं क्योंकि कई इलाकों में सूखा पड़ा हुआ है। जावा आईलैंड पर चावल की पैदावार पर भी काफी असर पड़ने की संभावना है। थाईलैंड में रबर का उत्पादन भी कम होने की संभावना है। 

चीन में 1961 के बाद सबसे ज्यादा बारिश

चीन के दक्षिणी राज्यों में 1961 के बाद सबसे ज्यादा बारिश देखने को मिल रही है। इन राज्यों में सबसे ज्यादा चावल और गेहूं की पैदावार होती है। दूसरे नंबर पर मक्का होती है और इसकी फसल भी कमजोर रहेगी।  

वियतनामः कॉफी उत्पादन पर नहीं पड़ेगा असर

वियतनाम के कई हिस्सों में इस बार भीषण गर्मी और सूखा पड़ रहा है, जिससे यहां पर भी चावल और रबर के उत्पादन पर असर देखने को मिलेगा। हालांकि जिन इलाकों में कॉफी की पैदावार होती है, वहां के इलाकों में मौसम का खास असर देखने को नहीं मिला है। 

ऑस्ट्रेलिया का पूर्वी हिस्सा सूखे की चपेट में

एशिया के अलावा ऑस्ट्रेलिया का पूर्वी हिस्सा भी भयंकर सूखे की चपेट में है। क्वींसलैंड और न्यू साउथ वेल्स जैसे इलाके भी इसकी चपेट में हैं। इसके चलते बीफ और गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। देश को अन्य देशों से गेहूं की मांग को पूरा करने के लिए इसे आयात करना पड़ेगा। 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें