स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते प्रसार के साथ भारत में साइबर धोखाधड़ी तेजी से बढ़ी है, जहां पिछले साल करीब 2.4 अरब डॉलर से जुड़ी 24 लाख शिकायतें दर्ज हुईं। इस समस्या से निपटने के लिए एक अदालती आदेश के जरिए इंटरनेट संचालन (गवर्नेंस) के स्थापित नियमों को बदल दिया है। हालांकि, दुनिया के सबसे बड़े डोमेन विक्रेता गोडैडी ने आशंका जाहिर की है कि फर्जी वेबसाइटों पर इस कड़े प्रहार से वैध व्यवसाय असुरक्षित हो सकते हैं और इसके गंभीर वैश्विक परिणाम होंगे।
अमेरिका स्थित गोडैडी ने इन निर्देशों को दिल्ली उच्च न्यायालय की बड़ी पीठ के सामने चुनौती दी है। कंपनी का तर्क है कि 'डिफॉल्ट गोपनीयता' खत्म करने से वैध वेबसाइट मालिकों के नाम, पते, फोन नंबर और ईमेल सार्वजनिक हो जाएंगे, जिससे उन्हें उत्पीड़न और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इससे केवल वैध उपयोगकर्ता जैसे पत्रकार या छोटे व्यवसायी प्रभावित होंगे, असली जालसाज नहीं।
गोडैडी के अनुसार, ब्रांड नामों के हर अल्फान्यूमेरिक वेरिएशन को रोकना असंभव है। उदाहरण के लिए, 'मैकडॉनल्ड्स' मूल रूप से एक लोकप्रिय स्कॉटिश नाम है जिसका अर्थ 'दुनिया के शासक का पुत्र' होता है। इस पर पूरी तरह रोक लगाने से एक सामान्य भाषाई नाम पर एकाधिकार बन जाएगा।
यूनिलीवर के ट्रेडमार्क 'एचयूएल' के संरक्षण से 'hulk' या 'moghul' जैसे अंग्रेजी के कम से कम 118 शब्द प्रभावित होंगे। गोडैडी का कहना है कि ट्रेडमार्क के टकराव के बिना अंग्रेजी का कोई नया डोमेन पंजीकृत करना लगभग असंभव हो जाएगा।
भारत के गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, देश में हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार होता है, जिससे यह एक "राष्ट्रीय संकट" बन सकता है। गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय दोनों ही त्वरित जांच के लिए डोमेन पंजीकरण विवरण को आसानी से उपलब्ध कराने और वेरिफिकेशन को कड़ा करने के पक्ष में हैं। यह रुख सरकार की वैश्विक टेक कंपनियों के साथ पूर्व में हुई विवादों की कड़ियों से मेल खाता है। अब इस अहम कानूनी लड़ाई की अगली सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित है, जो भारत में डिजिटल सुरक्षा और इंटरनेट नियमों का भविष्य तय करेगी।