निर्यातकों का भी पंसदीदा केंद्र बन रहा भारत (सांकेतिक)
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भारत अब सिर्फ चावल बेचने वाला देश नहीं, बल्कि निर्यातकों का भी पंसदीदा केंद्र बन रहा है। इसका संकेत 23 से 25 अक्तूबर को आयोजित होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) से मिल रहा है। इस कार्यक्रम के लिए 138 देशों के 3,317 खरीदार पंजीकरण करा चुके हैं। इसमें खाड़ी देशों के 145 प्रतिनिधि हैं। भारतीय चावल की इस लोकप्रियता की वजह भारत की विक्रय नीति में रणनीतिक बदलाव है। लगभग 6,000 किस्मों की विविधता और रिकॉर्ड उत्पादन के दम पर भारत ने वैश्विक बाजार में अपनी गहरी धमक स्थापित कर ली है।
विश्व कृषि विभाग के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 में भारत का चावल उत्पादन 15.40 करोड़ टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर है, जो चीन 14.60 करोड़ टन से अधिक है। वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब 40 % है। भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है। दुनिया का 28 फीसदी चावल भारत में पैदा हो रहा है। इस तरह से भारत का चावल निर्यात में भी दबदबा कायम है। अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद के मुताबिक भारत 2.34 करोड़ टन चावल का निर्यात करेगा।
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चार माह में 47.9 लाख टन चावल का निर्यात
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ के अनुसार, नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 26 प्राथमिकता वाले बाजारों में निर्यात 23,476 करोड़ रुपये और 47.9 लाख टन रहा। यह पिछले तीन वर्षों के औसत से मूल्य में 1.1 प्रतिशत और मात्रा में 5.6 प्रतिशत अधिक है। सबसे तेज वृद्धि खाड़ी और यूरोप से हुई है। यूएई को निर्यात मूल्य में 65% और मात्रा में 64 % की बढ़ोत्तरी हुई।