खराब मौसम और खाड़ी एवं काला सागर क्षेत्र में युद्ध के बीच दुनियाभर में खाद्य वस्तुओं की कीमतें जुलाई 2026 में तीन साल से ज्यादा समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। एफएओ का खाद्य मूल्य सूचकांक बढ़कर 131.1 अंक हो गया। गेहूं, वनस्पति तेल और चीनी की कीमतों में भी तेजी दर्ज हुई। क्या दुनिया फिर खाद्य महंगाई की चपेट में आ सकती है? आम आदमी की थाली पर इसका कितना असर पड़ा है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
खराब मौसम और खाड़ी एवं काला सागर क्षेत्र में युद्ध ने महंगाई के मोर्चे पर दुनियाभर की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतें जुलाई, 2026 में बढ़कर तीन साल से ज्यादा समय के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। एफएओ का खाद्य मूल्य सूचकांक बीते महीने बढ़कर औसतन 131.1 अंक पहुंच गया, जो जनवरी, 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। जून में यह सूचकांक 130.3 अंक था।
आम आदमी की थाली 9% तक महंगी
लगातार दूसरे माह आरबीआई के लक्ष्य से अधिक रहेगी महंगाई
खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में उछाल के कारण जुलाई के आंकड़ों में महंगाई और बढ़ने का अनुमान है। 40 अर्थशास्त्रियों के एक सर्वे के मुताबिक, जुलाई में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.50 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकती है, जो जून में 4.38 फीसदी थी। अगर ऐसा हुआ, तो खुदरा महंगाई लगातार दूसरे महीने आरबीआई के 4 फीसदी के मीडियम-टर्म लक्ष्य से ऊपर रहेगी। खुदरा महंगाई के आंकड़े 12 अगस्त को जारी होंगे।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की चीफ इकनॉमिक एडवाइजर कनिका पसरीचा ने कहा, खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ रही है, जबकि दूसरी वस्तुओं की कीमतों का दबाव कम बना हुआ है। जुलाई में मानसून की स्थिति बेहतर होने से फसलों को फायदा हुआ है।