एक दशक के निचले स्तर पर ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर
ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था की वार्षिक आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पिछले एक दशक के सबसे निचले स्तर पर आ गयी है। आंकड़ों के मुताबिक जून में समाप्त वर्ष में ऑस्ट्रेलिया की जीडीपी वृद्धि दर महज 1.4 फीसदी पर रही।
ऑस्ट्रेलिया एक जुलाई से अगले साल के 30 जून तक के समय को एक वित्त वर्ष मानता है। ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार महज 0.40 फीसदी रही।
ऑस्ट्रेलिया में चिंता की स्थिति
ऑस्ट्रेलिया करीब 28 साल से मंदी को टालने में कामयाब रहा है लेकिन आंकड़ों से देश के आर्थिक परिदृश्य को लेकर चिंता की स्थिति पैदा हो गयी है।
आश्वस्त हैं प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिशन
हालांकि, प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिशन इस बात को लेकर आश्वस्त दिखे कि देश मंदी के इस दौर से बाहर निकलने में कामयाब रहेगा। स्थानीय रेडियो से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि हाल में कर दर में की गयी कटौती से चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था को नयी मजबूती मिलेगी।
सिंगापुर का घट गया निर्यात
सिंगापुर की अर्थव्यवस्था में निर्यात का काफी महत्वपूर्ण स्थान है। यह कुल जीडीपी का 176 फीसदी है। पिछले कुछ महीनों से यह काफी कम हो गया है और 2013 के स्तर पर पहुंच गया है। सिंगापुर के वित्त मंत्री हेंग स्वी कीट ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि सरकार ने इस बार जीडीपी के 1.5 फीसदी से 2.5 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है। सरकार पूरे मामले पर गंभीरता से नजर रखे हुए है।
26 साल के निचले स्तर पर चीन की विकास दर
चीन इंटरनेशनल कैपिटल कॉर्प (सीआईसीसी) के आंकड़ों के मुताबिक चीन में जुलाई 2018 से मई 2019 के बीच मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ट्रेड वॉर के चलते 19 लाख नौकरियां चली गई हैं।
ट्रेड वॉर के बीच चीन में विनिर्माण मांग घटी
अमेरिका से चल रही ट्रेड वॉर के बीच चीन के विनिर्माण क्षेत्र में मांग घटी है। दो सर्वेक्षणों में यह तथ्य उजागर हुआ है। कारोबार पत्रिका काइजिन का कहना है कि नए ऑर्डरों की तादाद इस साल के सबसे निचले स्तर पर है।
अमेरिका में टैरिफ में हुई बढ़ोतरी के चलते चीनी निर्यातकों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चीन के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है और उसे होने वाला निर्यात इस साल जुलाई में 6.5 फीसदी के स्तर पर आ गया। जून में खत्म हुई तिमाही में चीन की विकास दर 6.2 फीसदी रही, जो पिछले 26 साल में सबसे निचले स्तर पर है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरा
विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तकरार के कारण वैश्विक आर्थिक मंदी उपजने के संकेतों के बावजूद चीन और अमेरिका के बीच चल रहा ट्रेड वॉर खत्म होता नहीं दिखाई दे रहा है। चीन पर नए व्यापार समझौते के लिए दबाव बनाने की कवायद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसके उत्पादों के आयात पर 15 फीसदी शुल्क बढ़ा दिया है।
अमेरिकी उपभोक्ताओं को भारी पड़ रहा ट्रेड वॉर
चीन और अमेरिका के बीच चल रहा ट्रेड वॉर खुद अमेरिकी नागरिकों को बेहद भारी पड़ रहा है। करीब एक साल से ज्यादा समय से चल रही ट्रेड वॉर के कारण हो रही शुल्क बढ़ोतरी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि यह बोझ चीनी कंपनियों को उठाना पड़ रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका खामियाजा अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं को ज्यादा उठाना पड़ा है।
अमेरिकी घरों का रहन-सहन महंगा
जेपी मोर्गन के एक अध्ययन के मुताबिक, ट्रेड वॉर के कारण अमेरिकी घरों का खर्च औसतन 1000 डॉलर सालाना बढ़ गया है। यह अध्ययन ट्रंप की तरफ से एक सितंबर को और 15 दिसंबर को 15-15 फीसदी शुल्क और बढ़ाने के ऐलान से पहले की गया था। इसका मतलब है कि शुल्क बढ़ोतरी से अमेरिकी घरों का रहन-सहन और ज्यादा महंगा हो जाएगा।