फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीडीपी की आंकड़ेबाजीः कांग्रेस को जेटली का जवाब, सीएसओ एक विश्वसनीय संस्थान

Thu, 29 Nov 2018 01:06 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन

नए जीडीपी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर कांग्रेस के सवाल उठाने के जवाब में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय एक विश्वसनीय संस्थान है और यह वित्त मंत्रालय से एक निश्चित दूरी बनाकर रखता है।

विज्ञापन




जेटली ने कहा कि फरवरी 2015 में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने नए फॉर्मूले पर काम करना शुरू किया था, जिसमें आधार साल (बेस ईयर) 2011-12 रखा गया था और इसे जारी कर दिया गया था। यह नई सीरिज काफी अच्छे से तुलना करती है और अर्थव्यवस्था को सही मायने में दर्शाती है। 
विज्ञापन

 

 

जारी हुआ था जीडीपी का नया डाटा

नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार और सांख्यिकी मंत्रालय सेक्रेटरी प्रवीण श्रीवास्तव ने केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की तरफ से तैयार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का बैक सीरीज डाटा जारी किया। उन्होंने कहा कि इसमें ज्यादा क्षेत्र शामिल किए गए हैं, ताकि जीडीपी की गणना ठीक से हो।

पहले था 2004-05 आधार वर्ष

सरकार ने 2004-05 के बदले जीडीपी का साल बदलकर 2011-2012 किया है। बता दें कि जनवरी, 2015 में सरकार ने राष्ट्रीय खातों के लिए 2004-05 के बजाय 2011-12 को आधार वर्ष घोषित किया था। इससे पहले 2010 में यूपीए सरकार ने आधार वर्ष को बदला था।

राजीव कुमार ने कहा कि इस आंकड़े में ताजा सर्वेक्षण और जनगणना के डाटा को शामिल किया गया है। इसके अलावा नई सीरीज के रिटेल और थोक महंगाई के आंकड़े भी जोड़े गए हैं। इसमें स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड कंपनी, सेबी, पीएफआरडीए और आईआरडीए को भी शामिल किया गया है। कुमार के मुताबिक, 2004-05 और 2011-12 के बेस ईयर बदलने पर एक कमेटी ने जीडीपी में 3 लाख करोड़ का अंतर बताया था। 

उन्होंने यह भी कहा कि इन आंकड़ों को पेश करने के पीछे सरकार की कोई गलत मंशा नहीं है। श्रीवास्तव ने भी कहा कि पुरानी और नई सीरीज के आंकड़ों की तुलना नहीं की जानी चाहिए। नई गणना पद्धति को शीर्ष सांख्यिकीविदों ने परखा है।
विज्ञापन

एनडीए शासन में सुधरी दिखी है विकास दर

श्रीवास्तव के मुताबिक, वर्ष 2011-12 सीरीज के हिसाब से वित्त वर्ष-2013 के लिए जीडीपी 5.5 फीसदी, वित्त वर्ष-2014 के लिए 6.4 फीसदी है। नई सीरीज के हिसाब से वित्त वर्ष-2015 के लिए जीडीपी 7.4 फीसदी, वित्त वर्ष 2016 के लिए 8.2 फीसदी और वित्त वर्ष 2017 के लिए 7.1 फीसदी है। बता दें कि वित्त वर्ष 2015 से अब तक देश में वर्तमान एनडीए सरकार का शासन रहा है।

अगस्त वाली रिपोर्ट का असर तो नहीं

अगस्त 2018 में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की तरफ से बैक सीरीज डाटा के आकलन के लिए एक समिति का गठन किया गया था। इस कमेटी की तरफ से जारी रिपोर्ट के ड्राफ्ट में वर्तमान सरकार के चार सालों के मुकाबले यूपीए के 2004-05 से 2013-14 तक के शासनकाल में अर्थव्यवस्था का विकास ज्यादा तेजी से होने की बात कही गई थी। 

रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2006-07 के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में जीडीपी दर 10.08 फीसदी पर पहुंच जाने की बात कही गई थी, जो वर्ष 1991 में देश में उदारीकरण की शुरुआत के बाद सबसे ज्यादा विकास दर थी। 

बता दें कि आजादी के बाद देश की सबसे ऊंची 10.2 फीसदी की विकास दर वित्त वर्ष 1988-89 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासनकाल में आंकी गई थी। हालांकि कमेटी की यह रिपोर्ट गणना में त्रुटि की बात कहकर खारिज कर दी गई थी। इसके बाद ही अब यह नया बैक सीरीज डाटा सामने आया है।

ऐसे बदल गए हैं यूपीए के आंकड़े

वित्त वर्ष    पुरानी दर             नई दर

2006        9.3 फीसदी         7.9 फीसदी
2007        9.3 फीसदी         8.1 फीसदी
2008        9.8 फीसदी         7.7 फीसदी
2009        3.9 फीसदी         3.1 फीसदी
2010        8.5 फीसदी         7.9 फीसदी
2011       10.3 फीसदी         8.5 फीसदी
2012        6.6 फीसदी         5.2 फीसदी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें