माइकल ब्लूमबर्ग से मिले गौतम अदाणी।
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नई दिल्ली में आयोजित 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम' के दौरान दिग्गज अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी अमेरिकी कारोबारी माइकल ब्लूमबर्ग से मिले। इस मुलाकात के बाद अदाणी समूह के चेयरमैन ने भारत के ऊर्जा परिवार्वन की दिशा पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणी की। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी एक पोस्ट में गौतम अदाणी ने बताया कि भारत में कार्बन उत्सर्जन घटाने की पूरी प्रक्रिया सस्ती, विश्वसनीय और संतुलित बिजली आपूर्ति पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने चेताया कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बदलाव ऐसा कतई नहीं होना चाहिए जो आम परिवारों के लिए बिजली का खर्च बढ़ा दे या देश की औद्योगिक प्रगति को धीमा कर दे।
एनर्जी ट्रांजिशन को लेकर गौतम अदाणी की क्या है मुख्य चेतावनी?
गौतम अदाणी ने हरित ऊर्जा अपनाने के वैश्विक तरीकों पर बात करते हुए कहा कि कार्बन उत्सर्जन कम करना केवल एक ऐसा 'विचारधारात्मक आदेश' नहीं बन सकता जो आम नागरिकों को उनकी पहुंच से बाहर कर दे, कारखानों पर ताले लगवा दे या ग्लोबल साउथ के विकास को रोक दे।
- ग्रीन प्रीमियम घटाने पर जोर: अदाणी के अनुसार, हरित ऊर्जा को अपनाने के लिए लगने वाली अतिरिक्त लागत यानी 'ग्रीन प्रीमियम' को कम करना सबसे प्राथमिक जरूरत है।
- तीन शक्तियों का तालमेल: उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब पूंजी, नीति और क्रियान्वयन एक साथ मिलकर काम करें। इनका लक्ष्य तब तक ग्रीन प्रीमियम को घटाना होना चाहिए, जब तक कि स्वच्छ ऊर्जा निर्विवाद रूप से सबसे सस्ता और बेहतर विकल्प न बन जाए।
- पुरानी प्रणालियों पर निर्भरता: इसके साथ ही, उन्होंने जलवायु अनिश्चितताओं के बीच पुरानी ऊर्जा प्रणालियों पर लगातार निर्भर रहने के खतरों के प्रति भी आगाह किया।
राष्ट्र निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कौन से चार तत्व जरूरी हैं?
उद्योगपति अदाणी ने इस बात पर बल दिया कि भारत को अपने आर्थिक विकास और जीवन स्तर में सुधार के लिए बिजली आपूर्ति, औद्योगिक क्षमता और डिजिटल पहुंच का विस्तार करने की सख्त जरूरत है।
- भौतिक परिसंपत्तियों से आगे की सोच: उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा केवल बंदरगाहों, ट्रांसमिशन कॉरिडोर, ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्रों और कंप्यूटिंग सुविधाओं जैसे भौतिक ढांचों तक सीमित नहीं है; इसके लिए विश्वसनीय डेटा, जवाबदेह संस्थान और प्रभावी शासन व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
- राष्ट्र निर्माण के चार अनिवार्य पिलर: अदाणी ने कहा कि सच्चे राष्ट्र निर्माण के लिए चार शक्तियां आवश्यक हैं- धैर्यवान पूंजी, भौतिक क्रियान्वयन, पारदर्शी शासन और सक्षम स्थानीय नेतृत्व।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर का असली पैमाना: उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे का अंतिम मूल्यांकन निर्मित संपत्तियों से नहीं, बल्कि इस बात से किया जाना चाहिए कि लोग उसके माध्यम से क्या हासिल करने में सक्षम हुए हैं।
धारावी पुनर्विकास और शहरी विकास पर बैठक में क्या खास चर्चा हुई?
माइकल ब्लूमबर्ग के साथ हुई इस बैठक में ऊर्जा के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उन्नत विनिर्माण, ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास पर भी गहन मंथन हुआ।
- धारावी प्रोजेक्ट का जन-केंद्रित मॉडल: मुंबई की धारावी पुनर्विकास परियोजना का विशेष उल्लेख करते हुए अदाणी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट की सफलता को विकसित किए गए रियल एस्टेट के दायरे से नहीं, बल्कि वहां के निवासियों के जीवन स्तर और आजीविका में आए सुधार से मापा जाना चाहिए।
- शहरी नवीनीकरण की मिसाल: उन्होंने कहा कि यदि ढांचागत विकास को स्थानीय समुदाय के विश्वास और उनकी आर्थिक गतिविधियों की सुरक्षा के साथ जोड़ा जाए, तो यह परियोजना दुनिया भर में शहरी नवीनीकरण के लिए एक मिसाल बन सकती है। ब्लूमबर्ग और अदाणी समूह के मुखिया की यह मुलाकात वार्ता भारत के औद्योगिक और पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के बारे में बताती है। गौतम अदाणी का यह रुख साफ करता है कि भारत के भावी विकास का रास्ता पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक व्यवहार्यता के बीच एक व्यावहारिक संतुलन पर टिका है।