2,236 करोड़ रुपये की रिश्वत के मामले में न्यूयॉर्क की कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद अदाणी समूह के प्रमुख गौतम अदाणी व भतीजे सागर समेत आठ अधिकारियों पर गिरफ्तारी व प्रत्यर्पण का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका के प्रमुख अटॉर्नी ने कहा, यह मामला काफी आगे बढ़ सकता है। आरोपियों की गिरफ्तारी व प्रत्यर्पण की कोशिश भी की जा सकती है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यालय व्हाइट हाउस ने कहा कि भारत के साथ उसके रिश्ते मजबूत नींव पर टिके हैं। अमेरिका भारतीय उद्योगपति अदाणी पर लगे रिश्वत के आरोपों से उत्पन्न स्थिति से निपटने को लेकर आश्वस्त है।
उधर, सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों से मांगी अदाणी की जानकारी
सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों से पूछा है कि अदाणी ग्रीन एनर्जी लि. ने रिश्वतखोरी के आरोपों में अमेरिकी न्याय विभाग की जांच का खुलासा मार्च में किया था या नहीं? नियमों के मुताबिक, सूचीबद्ध कंपनियों पर लगे किसी भी आरोप का खुलासा करना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में दो सप्ताह लग सकते हैं। इसके बाद सेबी तय कर सकता है कि वह जांच को आगे बढ़ाएगा या नहीं। जांच का केंद्र बिंदु 15 मार्च को ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी अभियोजक जांच कर रहे थे कि क्या अदाणी की कंपनी या उससे जुड़े लोग अधिकारियों को सोलर प्रोजेक्ट का ठेका फाइनल करने के लिए रिश्वत दे रहे हैं। हालांकि समूह ने कहा था, चेयरमैन के खिलाफ किसी भी जांच के बारे में जानकारी नहीं है।
भारतीय बैंकों के लिए जोखिम कम
निवेश बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं व लेनदेन प्रसंस्करण की अग्रणी अमेरिकी कंपनी जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने कहा कि अदाणी समूह पर लगे आरोपों से भारतीय बैंकों व वित्तीय क्षेत्र के लिए जोखिम नहीं है, क्योंकि इनका ऋण प्रबंधनीय और जोखिम नियंत्रित है। मार्च तक अदाणी समूह में भारतीय बैंकों का ऋण बकाया ऋणों का लगभग 0.3 फीसदी था तथा ये ऋण परिसंपत्ति कवर थे।
पर, वैश्विक वित्तीय संस्थान चिंतित
कुछ वैश्विक बैंक अदाणी समूह को नया क्रेडिट देने पर अस्थायी रोक लगाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा ऋण जारी रहेंगे। एक प्रमुख वेस्टर्न बैंक के बैंकर ने कहा, हमें नए कर्ज देने पर रोक लगानी पड़ेगी, जब तक हम यह नहीं समझ जाते कि हालात कैसे रहेंगे। मुझे लगता है कि बैंक को क्रेडिट मार्केट में वापस आने में कुछ समय लगेगा।