रिपोर्ट में दावा- कॉरपोरेट और सरकारी आय में कमी से शहरी मांग घटी
कॉरपोरेट और सरकारी क्षेत्रों की आय में गिरावट के साथ-साथ परिवारों पर बढ़ते कर बोझ के कारण वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में शहरी मांग में कमी आई है। सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कॉरपोरेट आय में मंदी और सरकारी खर्च में कमी ने शहरी परिवारों को काफी प्रभावित किया है।
गैर- वित्तीय क्षेत्र में कर्मचारी मुआवजे पर कॉरपोरेट खर्च जून 2022 में 16.4 प्रतिशत के शिखर से घटकर Q2FY25 में 6.3 प्रतिशत हो गया। यह कर्मचारी मुआवजे में गिरावट की लगातार छठी तिमाही है, जिसका कारण बिक्री वृद्धि में मंदी है, जो इसी अवधि के दौरान 3.8 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट के अनुसार, "दोनों मोर्चों यानी कॉरपोरेट और सरकार से आय में कमी के साथ-साथ परिवारों पर बढ़ते कर भार के कारण शहरी मांग में कमी आ रही है"। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गैर-वित्तीय सेवाओं, वित्तीय सेवाओं और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में शहरी वास्तविक लाभ वृद्धि क्रमशः 1.7 प्रतिशत, 4.9 प्रतिशत और 3.6 प्रतिशत रही।
इस बीच, ब्याज भुगतान को छोड़कर, सरकार का वास्तविक राजस्व व्यय सितंबर 2024 में साल-दर-साल 10.5 प्रतिशत की तीव्र गिरावट के साथ वित्त वर्ष 2013 के बाद से सबसे कम स्तर पर पहुंच गया। चूंकि सरकार का 31 प्रतिशत खर्च ब्याज भुगतान पर खर्च होता है , इसलिए ऐसा होने से अन्य व्यय के लिए कम जगह बचती है।