भारत सरकार के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा है कि भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) में प्रोफेशनल सेवाओं को लेकर किए गए कानूनी प्रावधान, भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर और आर्किटेक्ट जैसे प्रोफेशनल्स के लिए विदेशों में काम के नए रास्ते खोलेंगे।
वाणिज्य सचिव ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) जैसे पेशेवर संगठनों से भी अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन करें और उनमें सक्रिय भागीदारी निभाएं। इससे ज्ञान साझा करने, वैश्विक सहयोग बढ़ाने और भारतीय पेशेवरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय प्रोफेशनल सेवाओं को वैश्विक बाजार तक पहुंच दिलाने के लिए तीन चीजें बेहद जरूरी हैं हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल, घरेलू इकोसिस्टम में सुधार और एफटीए के तहत प्रोफेशनल सेवाओं पर कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं।
एमआरए को लेकर चर्चाओं में यह सामने आया कि ऐसे समझौते करना और पहले से मौजूद समझौतों का सही इस्तेमाल करना बड़ी चुनौती है। इस पर जोर दिया गया कि एमआरए कितने कारगर हैं, इसे परखने के लिए साफ और मापने योग्य परिणाम तय किए जाएं।
बैठक में यह भी कहा कि भारत में विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए ज्यादा खुलापन होना चाहिए, ताकि दोनों पक्षों के लिए फायदे की स्थिति बन सके। इसके अलावा डेटा प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खुलने से मिलने वाले अवसरों पर भी चर्चा हुई। आंकड़ों के अनुसार भारत का सेवाओं का निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 390 अरब डॉलर रहा।