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FSSAI की बड़ी कार्रवाई: वेनोलेक्स फोर्टे पर लगाया प्रतिबंध, मातृ ड्रिंकिंग वाटर का लाइसेंस निलंबित

Mon, 03 Aug 2026 09:44 PM IST
राहुल कुमार आईएएनएस, नई दिल्ली
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एफएसएसएआई - फोटो : Social Media
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भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए त्रिपुरा की मातृ ड्रिंकिंग वाटर का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही पंजाब के मोहाली स्थित नोबल हेल्थकेयर के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करते हुए उसके उत्पाद वेनोलेक्स फोर्टे पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। 

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कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं
एफएसएसएआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों कंपनियों के खिलाफ गंभीर खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के चलते यह कार्रवाई की गई है। नियामक संस्था ने दोहराया कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए खाद्य क्षेत्र में निगरानी और प्रवर्तन लगातार जारी रहेगा। नोबल हेल्थकेयर के मामले में एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 36(3)(बी) के तहत वेनोलेक्स फोर्टे के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

नियामक संस्था के अनुसार, जांच के दौरान उत्पाद में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। एफएसएसएआई ने कहा कि इस उत्पाद में ऐसे तत्व शामिल थे, जिन्हें मौजूदा खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत अनुमति नहीं दी गई है। जांच में यह भी पाया गया कि उत्पाद में विटामिन-सी की मात्रा 90 मिलीग्राम थी, जो आईसीएमआर-एनआईएन (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन) की 2020 की गाइडलाइन में निर्धारित अनुशंसित दैनिक मात्रा (आरडीए) से अधिक प्रतीत होती है।
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एफएसएसएआई ने बताया कि वेनोलेक्स फोर्टे में कैल्शियम डोबेसिलेट, डायोसमिन और यूफोर्बिया प्रोस्ट्राटा जैसे औषधीय प्रभाव वाले तत्व मौजूद हैं, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक (हेल्थ सप्लीमेंट, न्यूट्रास्यूटिकल, विशेष आहार उपयोग, विशेष चिकित्सकीय उपयोग, फंक्शनल फूड और नॉवेल फूड) विनियम, 2022 के तहत अनुमत सामग्री की सूची में शामिल नहीं हैं।

उत्पाद की लेबलिंग और प्रस्तुति भी भ्रामक
नियामक संस्था ने यह भी पाया कि उत्पाद को "डायटरी फूड सप्लीमेंट" के रूप में प्रचारित किया जा रहा था और उसके नाम के ठीक नीचे एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था। एफएसएसएआई के अनुसार, इससे उपभोक्ताओं के बीच यह गलत धारणा बन सकती थी कि उत्पाद को खाद्य नियामक की विशेष मंजूरी या समर्थन प्राप्त है।

इसके अलावा, उत्पाद की लेबलिंग और प्रस्तुति भी भ्रामक पाई गई। एफएसएसएआई का कहना है कि इससे उत्पाद की कानूनी और नियामकीय स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हो सकता था और उपभोक्ताओं को यह गलत संदेश मिल सकता था कि यह सभी एफएसएसएआई मानकों का पूरी तरह पालन करता है। एफएसएसएआई ने कहा कि शुरुआती जांच में वेनोलेक्स फोर्टे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसी आधार पर उत्पाद के खिलाफ तत्काल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है।

डाबर के '100%' दावों वाले खाद्य उत्पादों पर FSSAI की रोक
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने डाबर इंडिया लिमिटेड को '100%' जैसे दावों के साथ बेचे जा रहे कई खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकने का निर्देश दिया है। इनमें शहद, गाय का घी, सेब का सिरका, शुद्ध नारियल तेल, तिल का तेल, नारियल पानी, नारियल दूध समेत अन्य उत्पाद शामिल हैं। एफएसएसएआई के अनुसार कंपनी अपनी वेबसाइट पर '100% प्राकृतिक', '100% शुद्ध', '100% शुद्धता की गारंटी', '100% जैविक' और '100% कोमल नारियल पानी' जैसे दावे कर रही थी, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 का उल्लंघन हैं। नियामक का कहना है कि ऐसे दावे अस्पष्ट, सत्यापित न किए जा सकने वाले और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं।

15 दिन में मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट
फएसएसएआई ने बताया कि डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक सेब का सिरका और डाबर ऑर्गेनिक शहद पर वैध एफएसएसएआई जैविक प्रमाणीकरण के बिना जैविक भारत का लोगो लगाया गया था। वहीं, डाबर होममेड नारियल दूध पर '100% शुद्धता' का दावा भी नियमों के विरुद्ध पाया गया, क्योंकि मिश्रित खाद्य उत्पादों पर ऐसा दावा अनुमत नहीं है। एफएसएसएआई ने कहा कि इससे पहले भी कंपनी को ऐसे भ्रामक '100%' दावे हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन संतोषजनक सुधार नहीं किया गया। अब प्राधिकरण ने डाबर को सभी ऐसे उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने और 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (एटीआर) जमा करने का निर्देश दिया है।

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