भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शुक्रवार को कई बड़ी फूड कंपनियों को नोटिस जारी किया है। इन कंपनियों पर उत्पादों के बारे में भ्रामक दावे करने, गलत ब्रांडिंग और लेबलिंग के नियमों के उल्लंघन का आरोप है। FSSAI ने इन कंपनियों को अपनी गलतियां सुधारने के निर्देश दिए हैं।
FSSAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया कि यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई है। जांच में पाया गया कि कई कंपनियां ऐसे दावे कर रही हैं जो ग्राहकों को गुमराह कर सकते हैं। ये दावे 2018 के विज्ञापन और लेबलिंग नियमों के खिलाफ हैं।
नोटिस पाने वाली कंपनियों में 'प्लक्क' (Pluckk) शामिल है। इस कंपनी के मैंगो जूस पर 'नो एडेड शुगर' (अलग से चीनी नहीं मिलाई गई) लिखा था। लेकिन जांच में पता चला कि इसमें मैंगो पल्प के साथ गन्ने का रस भी मिलाया गया था। विभाग का कहना है कि इससे ग्राहकों को चीनी की मात्रा के बारे में गलत जानकारी मिलती है। इसी तरह, एक कंपनी ने अपने पनीर पर 'नेचुरल पनीर' लिखा था। नियमों के मुताबिक, पनीर जैसे उत्पादों के लिए 'नेचुरल' शब्द का इस्तेमाल करना गलत है।
अन्य कंपनियों में 'मास्टरचाउ फूड्स' (MasterChow Foods) को '100 प्रतिशत नेचुरल' और 'ऑर्गेनिक आटा' जैसे दावों के लिए नोटिस मिला है। 'फेरेरो इंडिया' (Ferrero India) को किंडर जॉय पर 'मिल्क सॉलिड्स से भरपूर' लिखने और 'मैरिको लिमिटेड' (Marico Ltd) को सफोला तेल के स्वास्थ्य संबंधी दावों के लिए घेरा गया है। 'गौर हेल्दी फूड' को भी उसके टोफू उत्पाद के दावों पर नोटिस दिया गया है।
इसके अलावा मेडिजेन लैब्स, नेक्सा इंडस्ट्रीज, रॉ प्रेसेरी और कोरियन जिनसेंग जैसे ब्रांड्स को भी नोटिस मिले हैं। इन कंपनियों ने सेहत और शारीरिक क्षमता बढ़ाने के कई दावे किए थे। विभाग का कहना है कि इन दावों के लिए कंपनियों के पास कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं थे।
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FSSAI ने ग्राहकों की शिकायतों पर भी कड़ा रुख अपनाया है। 'बीकानेरवाला' (Bikanervala) को साफ-सफाई से जुड़ी शिकायत पर नोटिस मिला है। आरोप है कि कंपनी का कर्मचारी काम के दौरान किचन एरिया में खाना खा रहा था। कंपनी से इस मामले की जांच रिपोर्ट और सुधार के उपाय मांगे गए हैं।
वहीं, 'परम डेयरी लिमिटेड' (Param Dairy Limited) को दही और रबड़ी में फंगस मिलने की शिकायत पर नोटिस दिया गया है। यह सामान IRCTC की कैटरिंग सेवा के जरिए सप्लाई किया गया था। कंपनी को बताना होगा कि उसने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। FSSAI ने साफ किया है कि सभी कंपनियों को खाद्य सुरक्षा और विज्ञापन के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।