दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक, गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब केवल बंद प्रयोगशालाओं या शुरुआती टेक प्रेमियों (अर्ली एडॉप्टर्स) तक सीमित नहीं रहेगा। अगले पांच वर्षों के भीतर एआई एक ऐसा घरेलू उपकरण बनने जा रहा है, जो किसानों, डॉक्टरों, सरकारी अधिकारियों, डेवलपर्स और उद्यमियों की रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा होगा। पिचाई ने यह संदेश अपने पूर्व संस्थान आईआईटी खड़गपुर के 75 साल पूरे होने के अवसर पर एक विशेष वीडियो के जरिए साझा किया। उन्होंने वीडियो में बताया कि कैसे युवा भारतीय और देश के विश्वविद्यालय वैश्विक स्तर पर तकनीक के इस नए दौर का नेतृत्व करने जा रहे हैं।
सुंदर पिचाई ने अपने संदेश में बेहद सरल शब्दों में समझाया कि आने वाले पांच वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का दायरा लैब्स से बाहर निकलकर उन लोगों के हाथों में पहुंच जाएगा, जो समाज के लिए बुनियादी काम करते हैं। पिचाई के अनुसार,"जब मैं अगले पांच वर्षों को देखता हूं, तो मुझे एआई प्रयोगशालाओं और शुरुआती अपनाने वालों से दूर होकर सीधे स्वास्थ्य कर्मियों, सरकारी अधिकारियों, किसानों, डेवलपर्स और उद्यमियों के हाथों में जाता हुआ दिखाई देता है"। उनका मानना है कि इस तकनीक का विकास इस तरह किया जा रहा है कि यह हम सभी को हमारे काम को अगले स्तर पर ले जाने और उसे अधिक संतोषजनक तरीके से पूरा करने में मदद कर सके।
सुंदर पिचाई ने भारत की युवा और महत्वाकांक्षी पीढ़ी की तारीफ करते हुए कहा कि देश अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बन चुका है। भारत में लगातार ऐसे नए आविष्कार और नवोन्मेष तैयार हो रहे हैं, जिनका प्रभाव देश की सीमाओं से बाहर जाकर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। पिचाई का मानना है कि भारत की यह नई, महत्वाकांक्षी और आशावादी पीढ़ी इस बात की नई परिभाषा लिख रही है कि देश के लिए क्या कुछ संभव हो सकता है। इस बड़े बदलाव और विकास में एआई एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा।
इस बड़े तकनीकी बदलाव का लाभ समाज के हर वर्ग और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सुंदर पिचाई ने देश के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों पर डाली है। अपनी मातृसंस्था को याद करते हुए पिचाई ने कहा कि जब देश तकनीक की इस नई लहर का नेतृत्व करेगा, तो आईआईटी खड़गपुर जैसी संस्थाओं की भूमिका और उनका महत्व और अधिक बढ़ जाएगा। तकनीक को हर किसी के लिए मददगार और सुलभ बनाने में देश के विश्वविद्यालयों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण होने जा रहा है।
सुंदर पिचाई खुद भारत की इस शैक्षणिक और तकनीकी क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उन्होंने साल 1993 में आईआईटी खड़गपुर से मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री और व्हार्टन स्कूल से एमबीए पूरा किया।