विशेष सीबीआई अदालत ने शनिवार को 22 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण धोखाधड़ी मामले में भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के खिलाफ दायर आरोपपत्र की जानकारी लेते हुए मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया। विशेष न्यायाधीश ने आरोप पत्र पर विचार करने के लिए नए सिरे से आदेश देने के लिए मामले को मजिस्ट्रेट के पास वापस भेजने का आदेश दिया।
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एस्प्लेनेड अदालत ने इस साल मार्च में चोकसी और मामले के अन्य आरोपियों के खिलाफ सीबीआई के आरोप पत्र पर संज्ञान लिया था। हालांकि, चोकसी और सह-आरोपी अनियाथ नायर ने सीबीआई अदालत के समक्ष एक समीक्षा आवेदन दायर किया और कहा कि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है।
वकील विजय अग्रवाल और राहुल अग्रवाल के माध्यम से दायर याचिका में, आरोपी ने दावा किया कि ट्रायल (मजिस्ट्रेट) अदालत इस बात को समझने में विफल रही कि अपने मामले के समर्थन में सीबीआई के दायर किए गए दस्तावेज़ अस्वीकार्य साक्ष्य थे और ऐसे दस्तावेजों के आधार पर लिया गया ज्ञान ‘कानून की दृष्टि से गलत’ था। जांच एजेंसी ने इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (आईएफसीआई) लिमिटेड की दर्ज शिकायत के आधार पर अप्रैल 2022 में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि चोकसी और अन्य आरोपी 2014-2018 की अवधि के दौरान आईएफसीआई को धोखा देने की आपराधिक साजिश में शामिल थे।
बता दें कि जांच एजेंसी ने अप्रैल 2022 में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। यह एफआईआर इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (आईएफसीआई) लिमिटेड द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर थी। इन आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि चोकसी और अन्य आरोपी 2014-2018 की अवधि के दौरान आईएफसीआई को धोखा देने की आपराधिक साजिश में शामिल थे। चोकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स लिमिटेड (जीजीएल) ने मार्च, 2016 में 25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के लिए आईएफसीआई से संपर्क किया था।
मुंबई की सीबीआई अदालत में दाखिल आरोपपत्र में जांच एजेंसी ने कहा है कि चोकसी की फर्म गीतांजलि जेम्स ने इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (आईएफसीआई) से 896 रत्न जड़ित आभूषणों को गिरवी रखकर कर्ज लिया था। सरकार के अनुमोदित मूल्यांकों में इन हीरों की कीमत 45 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी। ऋण खाते के गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) में बदल जाने के बाद, आईएफसीआई ने गिरवी रखे हीरों से वसूली की प्रक्रिया शुरू की।
इतनी थी हीरों की कीमत
सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में बताया कि जब IFCI ने हीरों का नया मूल्यांकन किया तो उसे करारा झटका लगा। तब IFCI को जानकारी हुई कि इन हीरों की कीमत कर्ज लेते वक्त बताए गए उनके मूल्य से 98 फीसदी कम थी। IFCI द्वारा किए गए नए मूल्यांकन में आभूषणों का मूल्य 70 लाख रुपये से 2 करोड़ रुपये के बीच आंका गया है। ये हीरे हल्की गुणवत्ता के थे और इन्हें रंगीन पत्थरों पर केमिकल का इस्तेमाल कर लैब में बनाया गया। तब सामने आया कि ये हीरे हल्की गुणवत्ता के थे और उन्हें रंगीन पत्थरों पर केमिकल का इस्तेमाल कर लैब में बनाया गया था। वहीं सीबीआई अधिकारियों ने जांच के दौरान जब इन 896 हीरों का मूल्यांकन कराया तो इनकी कीमत 69.32 से 76.99 लाख तक आंकी गई।