राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एपल की प्रमुख निर्माता कंपनी फॉक्सकॉन पर काम को लेकर विवाहित महिलाओं से चल रहे भेदभाव मामले की कड़ी आलोचन की है। साथ ही, जांच में विफल रहने पर श्रम अधिकारियों को फटकार लगाई और मामलों की नए सिरे से संपूर्ण जांच चार सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया है।
जांच दस्तावेज से पता चला कि फॉक्सकॉन ने अपने तमिलनाडु प्लांट में आईफोन असेंबली के कामों से विवाहित महिलाओं को दूर रखा था। लेकिन, उच्च उत्पादन अवधि में प्रतिबंधों में ढील देकर इन्हीं विवाहित महिलाओं से असेंबली का काम कराया। इसके बाद एनएचआरसी ने जून, 2024 ने केंद्र और तमिलनाडु सरकार के श्रम अधिकारियों को फॉक्सकॉन की इन प्रथाओं की जांच का आदेश दिया था। श्रम अधिकारियों ने जांच के लिए जुलाई में फॉक्सकॉन प्लांट का दौरा किया था, लेकिन जांच निष्कर्षों को सार्वजनिक नहीं किया। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने भी तमिलनाडु श्रम विभाग से मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी मांगी थी।
एनएचआरसी ने इस आरोप का भी संज्ञान लिया
एनएचआरसी ने इस आरोप पर भी संज्ञान लिया कि कंपनी सांस्कृतिक मुद्दों और सामाजिक दबाव के कारण विवाहित महिलाओं को काम पर नहीं रखती है। एनएचआरसी की कार्रवाई मीडिया रिपोर्टों के खुलासे के बाद आई है। खबरों में दावा किया गया था कि कंपनी में नौकरी चाहने वालों से जनवरी 2023 और इस साल मई के बीच संपर्क किया गया था। उन्होंने खुलासा किया कि केवल अविवाहित महिलाएं ही कंपनी की असेंबली लाइन पर नौकरियों के लिए पात्र थीं, जबकि कंपनी के विज्ञापनों में ऐसी किसी भी नीति का कोई उल्लेख नहीं था।
एनएचआरसी जांच से संतुष्ट नहीं
तमिलनाडु के श्रम अधिकारियों ने 5 जुलाई को एनएचआरसी को बताया था कि प्लांट में कार्यरत 33,360 महिलाओं में 6.7 फीसदी विवाहित हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि वे असेंबली लाइन में काम करती थीं या नहीं। एनएचआरसी ने फटकार लगाते हुए कहा, श्रम अधिकारियों ने फॉक्सकॉन के भर्ती दस्तावेजों या विवाहित महिलाओं के प्रति भेदभाव की जांच ठीक से नहीं की है।