दुनिया की प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स व सेमीकंडक्टर कंपनी फॉक्सकॉन के प्रमुख यंग लू ने दावा किया है कि चीन को विश्व का उत्पादन हब बनाने में करीब 30 साल लग गए थे। इसकी तुलना में भारत इतना वक्त नहीं लेगा। उन्होंने भारत में पीएम मोदी के मेक इन इंडिया विजन को समर्थन में कहा कि यहां हुए सुधारों और नीतियों ने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन के लिए इकोसिस्टम के विकास के लिए विराट अवसर पैदा कर दिए हैं।
एक कार्यक्रम में पत्रकारों ने बातचीत में उनसे पूछा कि भारत में मेक इन इंडिया के तहत मोबाइल फोन के बाद टैबलेट और लैपटॉप भी बनाए जाने लगे हैं। यहां उत्पादन को लेकर वे क्या सोचते हैं? जवाब में होनहाई टेक्नोलॉजी ग्रुप के नाम से जानी जाने वाली कंपनी फॉक्सकॉन के अध्यक्ष यंग ने कहा, ‘हमने इतिहास में हमने देखा है कि चीन को उत्पादन इको-सिस्टम बनाने में 30 साल लग गए थे।
इसमें शक नहीं कि भारत को भी ऐसा करने में उचित समय लगेगा लेकिन उसके पास व्यापक अनुभव है, इसलिए उसे ऐसा इको-सिस्टम बनाने में कम समय लगेगा।
मददगार होगा एआई
यंग लू ने कहा, भारत के सामने बहुत कुछ वैसी ही परिस्थितियां आएंगी, जैसी चीन के सामने विकसित होते वक्त आईं। फिर भी 30 साल पहले के मुकाबले इस बार चीजें अलग होंगी। आज वातावरण 3 दशक पहले जैसा नहीं है। उस समय हमारे पास जनरेटिव एआई या किसी अन्य तरह का एआई नहीं था, आज है।
भारत महत्वपूर्ण देश बनने जा रहा
यंग ने कहा, ‘बीते कुछ वर्षों में भारत में हो रहे विकास को हर कोई देख सकता है। अब समय आ गया है। एक देश के तौर पर पूरी तरह विकसित होने की भारत की बारी है। अगर चीजों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो भविष्य में उत्पादन के मामले में भारत एक बहुत महत्वपूर्ण देश बनने जा रहा है।’
भारत में विकास के बड़े अवसर
उन्होंने पूछा कि क्या भारत का विकास पूरी तरह इतिहास में हुए अन्य देशों के विकास की तरह होगा? फिर कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि हमें इतिहास के आधार पर अनुमान लगाने चाहिए। हालांकि यह दिख रहा है कि भारत में इकोसिस्टम और औद्योगिक श्रृंखला विकसित करने के हमारे सामने आज बहुत बड़े अवसर हैं।’