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कॉन्टैक्टलेस भुगतान से जुड़ी वो चार गलत धारणाएं जिन्हें दूर करने की जरुरत है

Mon, 06 Jul 2020 04:41 AM IST
Rajeev Rai बिजनेस डायरी, अमर उजाला
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कॉन्टैक्टलैस भुगतान - फोटो : For Refernce Only
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कोविड-19 के  तेजी से फैलने और उसकी वजह से देशभर में लगे लॉकडाउन के बीच डिजिटल/कॉन्टैक्टलैस भुगतान के इस्तेमाल में काफी बढ़ोतरी हुई है हालांकि लगातार हो रही हैकिंग और साइबर धोखाधड़ी की वजह से उत्पन्न हुए डर ने भुगतान से जुड़ी बातों में कॉन्टैक्टलैस भुगतान कार्ड को मुख्य मुद्दा बना दिया है, जबकि भुगतान करने के लिए आसानी से टैप करने वाली टेक्नोलॉजी के चलते, यह टर्मिनल पर आपके भुगतान के कार्ड को स्वाइप करने या डालने की जरूरत को ख़त्म कर देता है, क्योंकि कार्ड कभी भी उपभोक्ता के हाथों से दूर नहीं होता है। यही टेक्नोलॉजी बिना छुए फोन के द्वारा भुगतान करना भी संभव बनाती है, जो कि  भुगतान करने का एक बढ़ता हुआ चलन बन गया है, जिसके जरिए भारत के लोगों ने भुगतान करना शुरू किया है। 
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हालांकि, कॉन्टैक्टलैस भुगतानों की सुरक्षा के बारे में कुछ गलत धारणाएं हैं जो रुकावट पैदा कर रही हैं और जिन्हें दूर करने की जरूरत है। ऐसे में आइए, कॉन्टैक्टलैस भुगतानों से सबंधित कुछ आम मिथकों और उनके पीछे के तथ्यों पर चर्चा करते हैं, ताकि इसका उपयोग करने वाले लोगों को यह समझने में मदद मिले कि कॉन्टैक्टलैस भुगतान पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं।

पैसों की इलेक्ट्रॉनिक चोरी

  • मिथक: एन.एफ.सी. सक्षम पी.ओ.एस उपकरण के साथ आपके पास खड़ा कोई चोर कॉन्टैक्टलैस कार्ड से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से आपके पैसों की चोरी कर सकता है।
  • सच: कॉन्टैक्टलैस पी.ओ.एस. टर्मिनलों को के.वाई.सी. का अनुपालन करने वाले व्यापारियों के लिए लगाया जाता है। यदि इन पी.ओ.एस. उपकरणों के साथ अवैध लेन-देन होता है, तो आसानी से बैंक और कानूनी अधिकारियों द्वारा उसका पता लगाया जा सकता है। हालांकि, एन.एफ.सी. सक्षम पी.ओ.एस. उपकरण के जरिए होने वाले फर्जी लेन-देन के लिए, चोर को कॉन्टैक्टलैस कार्ड या कार्डधारक से केवल 4 से.मी. दूर खड़े रहना होगा, जो आम तौर पर शक पैदा हुए बिना हो पाना संभव नहीं होता है। इसके अलावा, अगर किसी उपभोक्ता के संपर्क सूत्र उसके बैंक में अपडेट किए गए हैं, तो उसे उस लेन-देन के बारे में तुरंत सूचित किया जाता है, जिसकी जानकारी जारीकर्ता को दी जा सकती है।

गलती से टैप हो जाना

  • मिथक: कोई उपभोक्ता गलती से किसी रीडर पर किस कॉन्टैक्टलैस कार्ड को टैप कर देता है और किसी और की खरीदारी के लिए भुगतान कर बैठता है।
  • सच: किसी भी कार्डधारक को सफलतापूर्वक भुगतान करने के लिए एन.एफ.सी. सक्षम कार्ड रीडर के 4 से.मी. के दायरे के अंदर अपना कॉन्टैक्टलैस कार्ड रखना होता है। यहां तक कि अगर कोई उपभोक्ता गलती से कार्ड रीडर पर अपने कॉन्टैक्टलैस कार्ड को टैप कर देता है, तो पहले व्यापारी के राशि दर्ज किए बिना जाने के बिना भुगतान को पूरा नहीं किया जा सकता है।

खरीदारी करने के लिए चोरी किए गए कार्ड का दुरूपयोग करना

  • मिथक: किसी चोरी किए गए कॉन्टैक्टलैस कार्ड के साथ कोई चोर बहुत सारी खरीदारी करने के साथ-साथ बहुत सारे पैसे भी निकाल सकता है।
  • सच: कॉन्टैक्टलैस कार्ड में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं, जिनमें ई.एम.वी  चिप टेक्नोलॉजी, रीयल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम, एक शॉटड-रीड रेंज और बेजोड़ एनक्रिप्शन शामिल होते है जो कार्डधारक को कई फर्जी लेन-देन से बचाने में मदद करते है। कोई भी धोखेबाज बहुत सारी खरीदारी करने के लिए कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा क्योंकि अपने फोन पर तुरंत लेन-देन की सूचना मिलने पर उपभोक्ता कार्ड जारीकर्ता को सूचना दे सकता है या जारीकर्ता के ऐप में लॉगिन करके कार्ड को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर सकता है। हालांकि, यदि कोई कॉन्टैक्टलैस कार्ड खो जाता है/चोरी हो जाता है, तो चोरी किए गए कार्ड के जरिए भधिष्य में होने वाले सारे लेन-देन को रोकने के लिए कार्ड जारी करने के लिए बैंक को तुरंत सूचित करना चाहिए।
इसके अलावा हर देश की कॉन्टैक्टलैस लेन-देन की राशियों की अपनी सीमा होती है। भारत में, कॉन्टैक्टलैस भुगतान के लिए सीमा रु. 2,000 प्रति लेन-देन है। जबकि, रु. 2,000 से ऊपर के लेन-देन के लिए अब एक पिन दर्ज करना होता है, इस बात की संभावना नहीं है कोई चोर कार्ड के साथ-साथ कार्डधारक से पिन भी चुरा लेगा।
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नक़ली कार्ड बनाना

  • मिथक: दूसरे काडों की तरह आपके कॉन्टैक्टलेस कार्ड की नक़ल बनाना आसान है।
  • सच: आपके कॉन्टैक्टलैस भुगतान कवर्ड में एक ई.एम.वी चिप होती है, जिसमें आपके पुराने चुंबकीय पट्टी वाले कार्ड (बिना चिप वाला) की तुलना में धोखाधड़ी के विरूद्ध सुरक्षा प्रदान करने वाली सुविधाएं होती हैं। साथ ही, चुंबकीय स्ट्रिप कार्ड के जैसे इस चिप में कोई संवेदनशील डेटा नहीं होता है, जो कि कार्ड के डेटा को एन्क्रिप्ट नहीं करती हैं। इसलिए यदि आपका कॉन्टैक्टलैस कार्ड चोरी हो जाता है, तब भी जब आप बैंक को उसकी जानकारी दे सकते हैं, चोर आपके कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा क्योंकि जानकारी की नक़ल नहीं की जा सकती है।
कॉन्टैक्टलैस भुगतान उपभोक्ताओं को तेज़ी से लेन-देन करने का एक सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका प्रदान करते हैं। उपभोक्ताओं को एक जानकारीपूर्ण विकल्प को चुनने के लिए इन कार्डों को लेते समय इन गलत धारणाओं के बारे में पता होना चाहिए। हालांकि, किसी भी कार्डधारक को सतर्क रहना चाहिए और अपने संबंधित बैंकों को खोये हुए/चोरी हो गए कार्डों की जानकारी देनी चाहिए, बैंक अकाउंट के स्टेटमेंट्स की नियमित तौर पर चैक करते रहना चाहिए, बैंक की एस.एम.एस. सूचनाओं को सक्रिय रखना चाहिए और अनाधिकृत/संदिग्ध लेन-देन के बारे में बैंकों को तुरंत सूचित करना चाहिए।
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