- मिथक: किसी चोरी किए गए कॉन्टैक्टलैस कार्ड के साथ कोई चोर बहुत सारी खरीदारी करने के साथ-साथ बहुत सारे पैसे भी निकाल सकता है।
- सच: कॉन्टैक्टलैस कार्ड में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं, जिनमें ई.एम.वी चिप टेक्नोलॉजी, रीयल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम, एक शॉटड-रीड रेंज और बेजोड़ एनक्रिप्शन शामिल होते है जो कार्डधारक को कई फर्जी लेन-देन से बचाने में मदद करते है। कोई भी धोखेबाज बहुत सारी खरीदारी करने के लिए कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा क्योंकि अपने फोन पर तुरंत लेन-देन की सूचना मिलने पर उपभोक्ता कार्ड जारीकर्ता को सूचना दे सकता है या जारीकर्ता के ऐप में लॉगिन करके कार्ड को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर सकता है। हालांकि, यदि कोई कॉन्टैक्टलैस कार्ड खो जाता है/चोरी हो जाता है, तो चोरी किए गए कार्ड के जरिए भधिष्य में होने वाले सारे लेन-देन को रोकने के लिए कार्ड जारी करने के लिए बैंक को तुरंत सूचित करना चाहिए।
इसके अलावा हर देश की कॉन्टैक्टलैस लेन-देन की राशियों की अपनी सीमा होती है। भारत में, कॉन्टैक्टलैस भुगतान के लिए सीमा रु. 2,000 प्रति लेन-देन है। जबकि, रु. 2,000 से ऊपर के लेन-देन के लिए अब एक पिन दर्ज करना होता है, इस बात की संभावना नहीं है कोई चोर कार्ड के साथ-साथ कार्डधारक से पिन भी चुरा लेगा।
- मिथक: दूसरे काडों की तरह आपके कॉन्टैक्टलेस कार्ड की नक़ल बनाना आसान है।
- सच: आपके कॉन्टैक्टलैस भुगतान कवर्ड में एक ई.एम.वी चिप होती है, जिसमें आपके पुराने चुंबकीय पट्टी वाले कार्ड (बिना चिप वाला) की तुलना में धोखाधड़ी के विरूद्ध सुरक्षा प्रदान करने वाली सुविधाएं होती हैं। साथ ही, चुंबकीय स्ट्रिप कार्ड के जैसे इस चिप में कोई संवेदनशील डेटा नहीं होता है, जो कि कार्ड के डेटा को एन्क्रिप्ट नहीं करती हैं। इसलिए यदि आपका कॉन्टैक्टलैस कार्ड चोरी हो जाता है, तब भी जब आप बैंक को उसकी जानकारी दे सकते हैं, चोर आपके कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा क्योंकि जानकारी की नक़ल नहीं की जा सकती है।
कॉन्टैक्टलैस भुगतान उपभोक्ताओं को तेज़ी से लेन-देन करने का एक सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका प्रदान करते हैं। उपभोक्ताओं को एक जानकारीपूर्ण विकल्प को चुनने के लिए इन कार्डों को लेते समय इन गलत धारणाओं के बारे में पता होना चाहिए। हालांकि, किसी भी कार्डधारक को सतर्क रहना चाहिए और अपने संबंधित बैंकों को खोये हुए/चोरी हो गए कार्डों की जानकारी देनी चाहिए, बैंक अकाउंट के स्टेटमेंट्स की नियमित तौर पर चैक करते रहना चाहिए, बैंक की एस.एम.एस. सूचनाओं को सक्रिय रखना चाहिए और अनाधिकृत/संदिग्ध लेन-देन के बारे में बैंकों को तुरंत सूचित करना चाहिए।