भारत के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक, एचडीएफसी बैंक में कॉर्पोरेट गवर्नेंस का विवाद एक नया मोड़ पर पहुंच चुका है। बैंक के पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे की परिस्थितियों को लेकर बैंक की ओर से कराई गई बाहरी कानूनी जांच की जरूरत पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को गैर-जरूरी करार दिया है। इससे भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक बार फिर इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है।
चक्रवर्ती ने साफ किया है कि उन्होंने इस स्वतंत्र जांच में भाग लेने से पूरी तरह इनकार कर दिया था। उनका मजबूत तर्क यह है कि बैंक ने जांच का दायरा और इसका कानूनी आधार कभी उनके साथ साझा नहीं किया। मिंट की एक रिपोर्ट में चक्रवर्ती के हवाले से बताया गया कि उन्होंने जांच की प्रक्रिया से जुड़ने से पहले कई बार 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' की मांग की थी, लेकिन बैंक की ओर से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। चक्रवर्ती का यह भी कहना है कि उन्होंने जो सैद्धांतिक स्टैंड लिया था, उसके लिए उन्हें किसी बाहरी एजेंसी से मान्यता की कोई आवश्यकता नहीं है।
चक्रवर्ती की यह प्रतिक्रिया तब आई है जब एक दिन पहले ही एचडीएफसी बैंक ने स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया था कि दो बाहरी लॉ फर्मों की ओर से की गई जांच पूरी हो गई है।
इस विवाद की शुरुआत 17 मार्च को चक्रवर्ती के अचानक हुए इस्तीफे से हुई थी, जिसने इस साल की सबसे बड़ी गवर्नेंस बहस छेड़ दी थी। अपने त्यागपत्र में उन्होंने स्पष्ट किया था कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर हुए घटनाक्रम और प्रथाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मानकों के खिलाफ थीं। बिना कोई विशेष उदाहरण दिए उनके इस संक्षिप्त स्पष्टीकरण ने निवेशकों की चिंताएं काफी बढ़ा दी थीं, जिसके बाद बोर्ड को बाहरी कानूनी जांच का सहारा लेना पड़ा।
यह पूरा घटनाक्रम एचडीएफसी बैंक के लिए एक बेहद नाजुक समय पर सामने आया है। बैंक वर्तमान में कई प्रमुख नेतृत्व बदलावों पर नियामक मंजूरियों की प्रतीक्षा कर रहा है। इसमें सबसे अहम मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव शशिधर जगदीशन की पुनर्नियुक्ति है।
चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद कॉरपोरेट गवर्नेंस पर उठे सवालों ने इस साल निवेशकों के सेंटिमेंट पर भारी दबाव डाला था। बैंक का बोर्ड अपने उत्तराधिकार एजेंडे को आगे बढ़ाने से पहले एक स्वतंत्र मूल्यांकन चाहता था ताकि बाजार को शांत किया जा सके। अब बैंक ने जांच पूरी होने की घोषणा करते हुए गवर्नेंस के उच्च मानकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जो आगे चलकर निवेशकों का भरोसा दोबारा जीतने में अहम भूमिका निभा सकता है।