फूड प्रोसेसिंग यानी खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय कोई नया मंत्रालय नहीं है, पहले यह यह कृषि मंत्रालय का हिस्सा हुआ करता था। लेकिन खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की महत्ता और इसमें किए जाने वाले काम के आकार को देखते हुए सरकार ने इसे एक अलग मंत्रालय बना दिया।
इस मंत्रालय के सामने सबसे बड़ा लक्ष्य है प्रधानमंत्री की किसानों की आय को दोगुना करने की चाहत को पूरा करना। राह की चुनौतियां हैं प्रोसेसिंग के अभाव में उपज की बर्बादी को रोकना, किसानों के दरवाजे पर उद्योग को लाना और फूड पार्क, कोल्ड चेन के जरिए रोजगार के साथ कृषि तंत्र को विकसित करना।
इन सभी मुद्दों पर उमेश्वर कुमार की केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल से विशेष बातचीत हुई। पेश हैं इसके मुख्य अंश :
प्रश्न - अपने फोकस के तहत यह मंत्रालय क्या-क्या कर रहा है?
- मैं समझती हूं यह एक ऐसा मंत्रालय है, जो आज हमारे देश की मुख्य समस्याओं का समाधान निकालने में एक केंद्रीय भूमिका निभा सकता है। यह किसानी संकट को दूर करने, व्यापार को बढ़ाने, युवाओं को रोजगार देने में और आखिर में भारी मात्रा में खाद्य पदार्थों की बर्बादी को बचा सकता है। आज हम दुनिया में दूध के उत्पादन में एक नंबर पर हैं। दो नंबर पर हम फल, सब्जियां, मछली आदि के उत्पादन में हैं।
इसका अर्थ है कि किसान अपना पेट भरने के लिए मेहनत कर रहा है। लेकिन रख-रखाव का साधन कम होने, यानी, सिर्फ 10 फीसदी प्रोसेसिंग होने के कारण उत्पादों की खराबी ज्यादा होती है। मौसम का असर रहता है। व्यापारियों के पास उतना साधन नहीं हैं कि वे अपना व्यापार ज्यादा बढ़ा सकें। इन सभी चीजों को देखते हुए हम एक ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं, ऐसी नीतियां बना रहे हैं जिससे खाद्य प्रसंस्करण का दायरा और स्तर बढ़े। जिससे व्यापारियों को फायदा हो, रोजगार को फायदा हो और किसान का फायदा हो।