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Oil: रूस पर प्रतिबंधों के बाद नायरा एनर्जी ने बढ़ाया तेल उत्पादन, भारत में 93% तक बढ़ाई रिफाइनरी क्षमता

Sat, 01 Nov 2025 06:47 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी

सार

रूस समर्थित नायरा एनर्जी ने यूरोपीय प्रतिबंधों के बाद अपनी वाडिनार रिफाइनरी में कच्चे तेल का प्रसंस्करण बढ़ाकर 90–93% कर दिया है। जुलाई में यह घटकर 70–80% रह गया था। रूस की रोसनेफ्ट के पास नायरा में 49.13% हिस्सेदारी है। कंपनी अब केवल रूसी तेल से रिफाइनरी चला रही है और घरेलू ईंधन बिक्री में तेजी दर्ज की है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Google Gemini
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विस्तार
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मास्को पर प्रतिबंध के बाद रूस समर्थित भारतीय रिफाइनर नायरा एनर्जी ने अपनी वाडिनार रिफाइनरी में कच्चे तेल के प्रसंस्करण को क्षमता के 90 से 93 फीसदी तक बढ़ा दिया है। इस साल की शुरुआत में यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बाद परिचालन में कटौती के बाद यह फैसला किया गया है। जुलाई में यूरोपीय संघ के लगे प्रतिबंध के बाद नायरा के भारत में 4 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाले संयंत्र में तेल प्रसंस्करण घटकर 70 से 80 फीसदी तक रह गया था।

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सूत्रों के मुताबिक, तेल प्रसंस्करण घटने से नायरा के तेल निर्यात पर असर पड़ा। साथ ही, इराक और सऊदी अरब जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं ने कंपनी को कच्चे तेल की बिक्री रोक दी। प्रतिबंधों से पहले नायरा की रिफाइनरी अपनी क्षमता के 104 फीसदी पर चल रही थी। नायरा में रूसी संस्थाओं के पास सर्वाधिक हिस्सेदारी है। इनमें रोसनेफ्ट भी शामिल है, जिसके पास 49.13 फीसदी हिस्सा है। अमेरिका ने रोसनेफ्ट पर भी प्रतिबंध लगाया है। नायरा के कच्चे तेल उत्पादन में हाल ही में तेजी आई है क्योंकि इससे घरेलू ईंधन की बिक्री में वृद्धि हुई है।

नायरा अपने रिफाइनरी संयंत्र का संचालन केवल रूसी तेल से कर रही है। रूसी तेल की व्यवस्था रोसनेफ्ट ने की थी और व्यापारियों के माध्यम से नायरा को बेचा गया था। नायरा गैर स्वीकृत संस्थाओं के माध्यम से रूसी तेल खरीदना जारी रख सकती है। हालांकि, यह पता नहीं चल पाया कि नायरा अपने कच्चे तेल की खरीद के लिए भुगतान कैसे कर रही है।
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इंडियन ऑयल ने गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं से खरीदे क्रूड के पांच कार्गो
इंडियन ऑयल ने दिसंबर में आने वाले रूसी तेल के पांच कार्गो गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं से खरीदे हैं। अमेरिका द्वारा भारत पर रूसी तेल खरीदना बंद करने के दबाव के बावजूद कंपनी ने खरीदारी फिर से शुरू कर दी है। यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध के लिए रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें नौवहन पर प्रतिबंध भी शामिल हैं। इन प्रतिबंधों के कारण रूस को अपना तेल भारी छूट पर बेचना पड़ा है। पिछले तीन वर्षों में भारत रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।

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